वैश्विक मंच पर बढ़ेगा भारत का रक्षा दम, फार्नबरो एयर शो में दिखेगी तेजस की ताकत, कोच्चि में जुटेंगी 40 देशों की नौसेनाएं
भारत रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में अपनी बढ़ती क्षमता का प्रदर्शन वैश्विक स्तर पर करने की तैयारी में है। एक ओर हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ब्रिटेन में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित फार्नबरो इंटरनेशनल एयर शो में अपने स्वदेशी लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टरों का प्रदर्शन करेगी, वहीं दूसरी ओर भारतीय नौसेना कोच्चि में 40 से अधिक देशों की भागीदारी वाले बहुराष्ट्रीय अभ्यास 'ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस 2026' की मेजबानी करेगी।
एचएएल 20 से 24 जुलाई तक ब्रिटेन के हैम्पशायर में आयोजित फार्नबरो इंटरनेशनल एयर शो में हिस्सा लेगी। कंपनी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. डी.के. सुनील के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल इस आयोजन में शामिल होगा। एयर शो के दौरान एचएएल अपने स्वदेशी रक्षा प्लेटफॉर्म जैसे एलसीए तेजस, लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर प्रचंड, एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर ध्रुव, रुद्र और लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर का प्रदर्शन करेगी। इसके माध्यम से भारत अपनी स्वदेशी डिजाइन, अनुसंधान, विकास और रक्षा उत्पादन क्षमता को दुनिया के सामने प्रस्तुत करेगा।
इस आयोजन के दौरान एचएएल की योजना विमान प्रणालियों, एयरो इंजन, एवियोनिक्स, रखरखाव, मरम्मत और अत्याधुनिक विनिर्माण तकनीकों के क्षेत्र में वैश्विक कंपनियों के साथ सहयोग बढ़ाने की भी है। कंपनी जीई एयरोस्पेस, ईटन एयरोस्पेस, हनीवेल, सफरान, मार्टिन-बेकर और एमबीडीए जैसी अंतरराष्ट्रीय रक्षा कंपनियों के साथ संभावित रणनीतिक साझेदारियों पर चर्चा करेगी। इसके अलावा सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (SIDM), ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय और यूके-इंडिया बिजनेस काउंसिल के सहयोग से भारतीय रक्षा उद्योग का प्रतिनिधिमंडल भी एयर शो में हिस्सा लेगा, ताकि भारतीय कंपनियों को वैश्विक रक्षा बाजार में नए अवसर मिल सकें।
वहीं, भारतीय नौसेना 20 जुलाई से कोच्चि स्थित दक्षिणी नौसेना कमान में चार दिवसीय बहुराष्ट्रीय अभ्यास 'ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस 2026' का आयोजन करेगी। इस अभ्यास में कंबाइंड मैरीटाइम फोर्सेज (CMF) के सदस्य 40 से अधिक देशों की नौसेनाएं भाग लेंगी। इस दौरान समुद्री सुरक्षा, संयुक्त अभियान, आधुनिक रक्षा प्रणालियों और सर्वोत्तम सैन्य प्रक्रियाओं पर प्रशिक्षण एवं अनुभव साझा किया जाएगा।
भारतीय नौसेना के अनुसार, इस अभ्यास में प्रतिभागियों को सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों प्रकार का प्रशिक्षण दिया जाएगा। अत्याधुनिक सिमुलेटरों, युद्धपोतों और समुद्री संचालन प्रणालियों के माध्यम से संयुक्त अभ्यास आयोजित किए जाएंगे। इस पहल का उद्देश्य समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना, अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को बढ़ावा देना और हिंद महासागर क्षेत्र में सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाना है।
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