वैधानिक निकायों में दिव्यांगों को आरक्षण दें: मद्रास हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को दिए निर्देश
जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और जस्टिस वी लक्ष्मीनारायणन की पीठ ने पोलियो से पीड़ित बी रमेशबाबू की याचिका पर हाल ही में पारित आदेश में केंद्र सरकार को यह निर्देश दिया। याचिकाकर्ता ने 10 मार्च, 2025 को याचिका देकर दिव्यांग व्यक्तियों के लिए केंद्रीय और राज्य अधिनियमों के तहत वैधानिक निकायों में निर्वाचित प्रतिनिधियों की पहचान करने के लिए अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की।
चेन्नई (आरएनआई) मद्रास हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और मुख्य आयुक्त दिव्यांगजन को निर्देश दिया कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग जैसे वैधानिक निकायों में दिव्यांग जनों को चार फीसदी आरक्षण देने के लिए उचित कदम उठाएं। जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और जस्टिस वी लक्ष्मीनारायणन की पीठ ने पोलियो से पीड़ित बी रमेशबाबू की याचिका पर हाल ही में पारित आदेश में केंद्र सरकार को यह निर्देश दिया।
याचिकाकर्ता ने 10 मार्च, 2025 को याचिका देकर दिव्यांग व्यक्तियों के लिए केंद्रीय और राज्य अधिनियमों के तहत वैधानिक निकायों में निर्वाचित प्रतिनिधियों की पहचान करने के लिए अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की। पीठ ने कहा, याचिकाकर्ता की शिकायत यह है कि दिव्यांग व्यक्तियों को बार काउंसिल ऑफ इंडिया, नेशनल मेडिकल काउंसिल, डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया और फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया जैसे वैधानिक निकायों में प्रतिनिधित्व नहीं दिया जा रहा है।
यह देखते हुए कि सुप्रीम कोर्ट ने 6 मई, 2025 के अपने आदेश में निर्देश दिया था कि महिलाओं को सर्वोच्च न्यायालय बार एसोसिएशन की कार्यकारी समिति में उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए, पीठ ने कहा, सर्वोच्च न्यायालय ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्ति का प्रयोग करते हुए ऐसा निर्देश जारी किया है। हालांकि उच्च न्यायालय भी एक सांविधानिक न्यायालय है, लेकिन वह तब तक कोई रिट जारी नहीं कर सकता जब तक कि याचिकाकर्ता किसी कानूनी अधिकार के अस्तित्व को न दिखाए। हालांकि, हम निश्चित रूप से प्रतिवादियों (अधिकारियों) को उस दिशा में उचित कदम उठाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
पीठ ने कहा, याचिकाकर्ता का यह तर्क उचित है कि दिव्यांग व्यक्तियों को जीवन के हर क्षेत्र में उचित प्रतिनिधित्व का अधिकार है। इसीलिए संसद ने दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 को अधिनियमित किया, जिसमें 4% आरक्षण का प्रावधान है। उक्त अधिनियम की धारा 32 और 34 उच्च शिक्षा संस्थानों और पदों में आरक्षण का प्रावधान करती है। पीठ ने कहा कि धारा 33 सरकार को प्रतिष्ठानों में ऐसे पदों की पहचान करने का अधिकार देती है, जिन पर बेंचमार्क विकलांगता वाले संबंधित वर्ग के व्यक्ति रह सकते हैं।
पीठ ने कहा, याचिकाकर्ता का यह तर्क उचित है कि दिव्यांग व्यक्तियों को जीवन के हर क्षेत्र में उचित प्रतिनिधित्व का अधिकार है। इसीलिए संसद ने दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 को अधिनियमित किया, जिसमें 4% आरक्षण का प्रावधान है। उक्त अधिनियम की धारा 32 और 34 उच्च शिक्षा संस्थानों और पदों में आरक्षण का प्रावधान करती है। पीठ ने कहा कि धारा 33 सरकार को प्रतिष्ठानों में ऐसे पदों की पहचान करने का अधिकार देती है, जिन पर बेंचमार्क विकलांगता वाले संबंधित वर्ग के व्यक्ति रह सकते हैं।
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