जोमी समुदाय का विरोध: केंद्रीकृत भूमि पंजीकरण प्रणाली पर सरकार से अधिसूचना वापस लेने की मांग
जोमी प्रमुख संघ (ZCA) ने मणिपुर सरकार की केंद्रीकृत भूमि पंजीकरण अधिसूचना को असांविधानिक बताते हुए वापस लेने की मांग की। संगठन का आरोप है कि यह आदिवासी अधिकारों पर हमला है और जो लोगों को अलग केंद्र शासित प्रदेश की ओर धकेल रहा है।
चुराचंदपुर (आरएनआई) जोमी प्रमुख संघ (ZCA) ने रविवार को मणिपुर सरकार की उस अधिसूचना का विरोध किया, जिसमें पूरे राज्य के लिए एक केंद्रीकृत भूमि पंजीकरण प्रणाली लागू करने की बात कही गई है। संगठन ने इसे असांविधानिक और आदिवासी अधिकारों पर सीधा हमला बताते हुए तुरंत वापस लेने की मांग की।
जेडसीए ने आरोप लगाया कि मैतेई समुदाय ने झूठा दावा किया कि उन्हें आदिवासी बहुल क्षेत्र में प्रवेश करने से रोका गया है, जबकि हकीकत यह है कि मैतेई लोग पहाड़ी इलाकों में जमीन हासिल करने में कामयाब रहे। संगठन का आरोप है कि आजादी के बाद से ही व्यवस्थित तरीके से उनकी भूमि, खासकर घाटी से सटी सीमावर्ती जगहों पर, बिना उनकी अनुमति के मिला दी गई।
जेडसीए ने कहा कि इंफाल में सभी जमीनों का पंजीकरण कराने की कोशिश जनजातीय लोगों का सांविधानिक संरक्षण छीनने की योजना है। संगठन ने चेतावनी दी कि अगर अधिसूचना वापस नहीं ली गई तो जो जनजाति को अपने अधिकार और जमीन बचाने के लिए 'विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश' की मांग पर कायम रहना पड़ेगा।
18 सितंबर की अधिसूचना के अनुसार, मणिपुर सरकार ने स्थानीय लोगों से बाहरी लोगों को भूमि हस्तांतरण के लिए दस्तावेजों के पंजीकरण पर भी रोक लगा दी है। इधर, चुराचांदपुर के विभिन्न स्थानों पर शनिवार से पोस्टर लगे हुए मिले, जिन पर लिखा- 'हमारे जीवन को सुरक्षित करो, और हमारे भविष्य को बचाओ, पृथक्करण ही एकमात्र समाधान है और कोई समाधान नहीं, कोई आराम नहीं।'
मई 2023 से मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच जातीय हिंसा में अब तक 260 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग बेघर हो गए हैं। फिलहाल राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू है।
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