गुरुवायुर मंदिर में तय तिथि पर ही होगी ‘उदयस्थमन पूजा’, सुप्रीम कोर्ट ने कहा — “परंपरा से कोई खिलवाड़ नहीं”

Oct 30, 2025 - 16:48
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गुरुवायुर मंदिर में तय तिथि पर ही होगी ‘उदयस्थमन पूजा’, सुप्रीम कोर्ट ने कहा — “परंपरा से कोई खिलवाड़ नहीं”

नई दिल्ली (आरएनआई)। सुप्रीम कोर्ट ने केरल के प्रसिद्ध गुरुवायुर श्रीकृष्ण मंदिर में होने वाली ‘उदयस्थमन पूजा’ पर बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि यह पूजा अपनी पारंपरिक तिथि और पद्धति के अनुसार ही संपन्न होगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस सदियों पुरानी परंपरा में किसी भी तरह का बदलाव या हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं है।

जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने कहा कि ‘उदयस्थमन पूजा’ वर्ष 1972 से लगातार पारंपरिक रूप से की जा रही है, और इसमें परिवर्तन परंपरा के साथ खिलवाड़ होगा। अदालत ने मंदिर प्रशासन की उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें भीड़ प्रबंधन के कारण पूजा रद्द करने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि यह पूजा एकादशी के अवसर पर 1 दिसंबर को निर्धारित परंपरा के अनुसार ही आयोजित की जाएगी।

यह विशेष पूजा सूर्योदय से सूर्यास्त तक चलती है, जिसमें लगातार 18 पूजा, हवन, अभिषेक और अन्य वैदिक कर्मकांड संपन्न होते हैं। इसे भक्तों के लिए अत्यंत शुभ और पवित्र अवसर माना जाता है।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि धार्मिक परंपराओं को लेकर कोई भी मनमाना निर्णय नहीं लिया जा सकता। अदालत ने कहा, “यह पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। इसे किसी प्रशासनिक सुविधा के नाम पर बदला नहीं जा सकता।”

कोर्ट ने यह भी याद दिलाया कि मंदिर के मुख्य पुजारी ने वर्ष 1996 में अपने लेख में स्वयं लिखा था कि गुरुवायुर मंदिर की पूजा-पद्धति आदि शंकराचार्य द्वारा निर्धारित की गई थी, और इसमें किसी भी प्रकार का विचलन अस्वीकार्य है।

यह मामला पुजारी पी.सी. हैरी और अन्य पारंपरिक अधिकारधारक परिवारों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि ‘एकादशी’ गुरुवायुर मंदिर का सबसे महत्वपूर्ण पर्व है और ‘उदयस्थमन पूजा’ इससे जुड़ी प्रमुख परंपरा है, जो 1972 से लगातार की जा रही है। उनका कहना था कि परंपरा को तोड़ना धार्मिक विश्वास और “दैवीय चैतन्य” दोनों को प्रभावित कर सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों को स्वीकार करते हुए कहा कि इस पूजा की परंपरा में कोई परिवर्तन नहीं होगा और इसे तय तिथि — 1 दिसंबर — को ही संपन्न किया जाएगा। अदालत ने सभी पक्षों को अपनी दलीलें पूरी करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई मार्च 2026 के लिए निर्धारित की है।

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