कीचड़ में शव संस्कार और बैलगाड़ी में प्रसूता क्या यही है भाजपा का अमृतकाल? - विधायक ऋषि अग्रवाल
गुना (आरएनआई) बमोरी विधानसभा क्षेत्र के चंदेरा गांव से सामने आई एक मार्मिक और झकझोर देने वाली तस्वीर ने पूरे क्षेत्र को सोचने पर मजबूर कर दिया है। भारी बारिश के बीच जब एक ग्रामीण का अंतिम संस्कार करना पड़ा, तो परिजनों को शव को बारिश से बचाने कीचड़ के बीच बरसते पानी मे केवल एक टीन की चादर का सहारा लेना पड़ा। गांव में न तो श्मशान घाट की सुविधा है, न ही वहां तक कोई रास्ता।
इस घटना को लेकर बमोरी विधायक इंजी. ऋषि अग्रवाल ने गहरा दुख जताया और इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए सरकार पर तीखा प्रहार किया।
उन्होंने कहा कि जिसे सरकार अमृतकाल कह रही है, वह वास्तव में जनता के लिए मुसीबतकाल बन गया है। जब अंतिम संस्कार तक के लिए लोगों को टीन चादरों और तिरपाल का सहारा लेना पड़े और गर्भवती महिलाओं को बैलगाड़ी में अस्पताल ले जाना पड़े, तब सवाल उठता है कि क्या यही है विकास? विधायक अग्रवाल ने जानकारी दी कि उनके संज्ञान में पहले भी कई ऐसे मामले आए हैं जहां श्मशान घाट या मुक्तिधाम न होने के कारण ग्रामीणों को अंतिम संस्कार के लिए भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कई जगह तो मुक्तिधाम तक पहुंचने के लिए उचित पहुंच मार्ग भी उपलब्ध नहीं है।
वन विभाग की अनुमति न होने से नहीं बन रहा पहुंच मार्ग
विधायक ने जमडेरा क्षेत्र की भी एक और दिल दहला देने वाली घटना का जिक्र किया, जहां एक गर्भवती महिला को केवल इसलिए बैलगाड़ी में अस्पताल ले जाना पड़ा क्योंकि वहां तक पहुंचमार्ग नहीं बन पाया। उन्होंने बताया कि ऐसा अकेला यही गांव नहीं बल्कि बमौरी विधानसभा में ऐसे कई गांव मजरे टोले हैं जहां वर्ष काल के दौरान यही स्थिति का सामना ग्रामीणों को बार बार करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि वन विभाग की अनुमति नहीं मिलने के कारण वर्षों से वहां मार्ग नहीं बन पा रहा है, इसके अलावा कई गांव ऐसे हैं जहां अनुमति की आवश्यकता न होते हुए भी मार्ग नहीं बन पा रहे क्योंकि सरकार द्वारा सुदूर सड़क योजना अघोषित तौर पर बंद कर दी गई है। स्थिति यह है कि ग्रामीण क्षेत्र में कई गांवों में वर्षाकाल को देखते हुए गांव वालों को स्वयं श्रमदान कर निजी खर्च पर अपने पहुंच मार्ग दुरुस्त करना पड़ते हैं जो सरकार की विफलता दिखाती है। उन्होंने कहा कि जहां वनविभाग अनुमति नही दे रहा वहां कांग्रेस शासनकाल मे बिजली पहुंच चुकी है। लोगों के मकान बने हुए हैं। हेण्डपम्प लगे हैं। लेकिन पहुंच मार्ग न होने से ग्रामीणों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
बुनियादी सुविधाएं देने में असफल भाजपा सरकार
ऋषि अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार लगातार अमृतकाल के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन सच्चाई यह है कि वह आम जनता को सबसे बुनियादी सुविधाएं जैसे श्मशान घाट, सड़क, पेयजल, बिजली और एम्बुलेंस सेवा तक नहीं दे पा रही है। उन्होंने याद दिलाया कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के तहत इन गांवों में बिजली पहुंचाई थी, लेकिन मौजूदा सरकार को जनता की मूलभूत जरूरतों से कोई सरोकार क्यों नहीं है।
हर गांव में हो मुक्तिधाम, एम्बुलेंस के लिए बने रास्ता
विधायक ने बताया कि उनका प्रयास है बमोरी विधानसभा के हर गांव में एक मुक्तिधाम और पहुंचमार्ग हो। इसके लिए हर सम्भव प्रयास करेंगे। समबंधित विभाग से मांग करेंगे। मूलभूत सुविधाओं के लिए वे प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने मांग की है कि प्रत्येक पंचायत स्तर पर यह सुनिश्चित किया जाए कि हर गांव में न केवल मुक्तिधाम हो, बल्कि वहां तक पहुँचने का पहुंच मार्ग भी हो, जिससे एम्बुलेंस जैसे चारपहिया वाहन आसानी से पहुँच सकें। जनता की बुनियादी जरूरतों की पूर्ति सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता और जिम्मेदारी होनी चाहिए
मानवता के नाम पर सवाल
चंदेरा और जमडेरा की घटनाएं केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि हमारी व्यवस्था की असंवेदनशीलता को भी उजागर करती हैं। यह वक्त है जब सरकार को दिखावे के बजाय ज़मीनी हकीकत से जुड़कर काम करना चाहिए।
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