अतिक्रमण पर प्रशासन का कठोर प्रहार, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व राघौगढ़ द्वारा 15 दिवस का कारावास आदेशित

Feb 3, 2026 - 21:05
Feb 3, 2026 - 21:06
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अतिक्रमण पर प्रशासन का कठोर प्रहार, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व राघौगढ़ द्वारा 15 दिवस का कारावास आदेशित

गुना (आरएनआई)अवैध अतिक्रमण के मामलों में ज़ीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए राजस्व प्रशासन द्वारा एक सशक्त एवं अनुकरणीय कार्यवाही की गई है। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), राघौगढ़ श्री अमित सोनी द्वारा राजस्व कानूनों की अवहेलना करने वाले अतिक्रमणकारी के विरुद्ध कठोर दंडात्मक आदेश पारित किया गया है। 

प्राप्त जानकारी के अनुसार, तहसीलदार मकसूदनगढ़ द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन के आधार पर यह तथ्य संज्ञान में आया कि आवेदक गेंदालाल पुत्र बट्टूलाल कुशवाहा, ग्राम बरोद स्थित भूमि सर्वे क्रमांक 0175/1/5/1 एवं 172/2, रकबा 0.670 हेक्टेयर एवं 0.679 हेक्टेयर (कुल रकबा 1.349 हेक्टेयर) पर अनावेदक बालमुकुंद, विनोद एवं देवेंद्र पुत्र रामनारायण, जाति कुशवाहा द्वारा अवैध एवं अनधिकृत कब्ज़ा किया गया था।

मामले में यह भी पाया गया कि संबंधित अनावेदकों द्वारा मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 250 के अंतर्गत पारित आदेशों का जानबूझकर पालन नहीं किया गया, जिससे शासन की संपत्ति पर अवैध कब्ज़ा बना रहा। उक्त परिस्थितियों में धारा 250(8) के अंतर्गत सिविल जेल की कार्यवाही हेतु प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया।

प्रकरण की गंभीरता, निरंतर अवहेलना तथा कानून के प्रति उदासीनता को दृष्टिगत रखते हुए, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व राघौगढ़ द्वारा सक्षम न्यायिक अधिकारों का प्रयोग करते हुए संबंधित अनावेदक को 15 दिवस के लिए जेल में भेजे जाने का आदेश पारित किया गया।

यह कार्यवाही स्पष्ट रूप से इंगित करती है, कि भूस्वामी की भूमि पर अतिक्रमण एवं न्यायालयीन आदेशों की अवमानना किसी भी स्थिति में सहन नहीं की जाएगी। राजस्व प्रशासन ने यह संदेश दिया है कि अवैध कब्ज़ाधारियों के विरुद्ध अब केवल औपचारिक कार्यवाही तक सीमित न रहते हुए कठोर दंडात्मक उपाय अपनाए जाएंगे। ऐसे तत्वों के विरुद्ध आगे भी सख़्त एवं निरंतर अभियान चलाया जाएगा।

प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे शासकीय/किसी अन्य की भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्ज़ा न करें तथा अतिक्रमण संबंधी जानकारी तत्काल राजस्व विभाग को उपलब्ध कराएं। यह कार्यवाही जिले में कानून के भय, प्रशासनिक अनुशासन एवं सुशासन की स्थापना की दिशा में एक महत्वपूर्ण कार्यवाही मानी जा रही है।

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