328 स्वरूप गायब होने के मामले में एसजीपीसी पर घिरते सवाल, 28 दिसंबर को पांच सिंह साहिबानों की अहम बैठक

Dec 25, 2025 - 12:02
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328 स्वरूप गायब होने के मामले में एसजीपीसी पर घिरते सवाल, 28 दिसंबर को पांच सिंह साहिबानों की अहम बैठक

अमृतसर (आरएनआई)। श्री गुरु ग्रंथ साहिब के 328 पावन स्वरूपों के कथित रूप से लापता होने के अत्यंत संवेदनशील मामले में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। विशेषज्ञों और सिख संगठनों का मानना है कि इस गंभीर प्रकरण का समाधान धार्मिक या राजनीतिक मंचों पर नहीं, बल्कि कानून के दायरे में होना चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों को सजा मिल सके।

आरोप है कि एसजीपीसी नेतृत्व मामले की सीधी जिम्मेदारी लेने के बजाय इसे सिंह साहिबानों के पाले में डालकर जांच से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है। इसी कड़ी में 28 दिसंबर को अकाल तख्त साहिब में पांच सिंह साहिबानों की आपात बैठक बुलाई गई है। बताया जा रहा है कि एसजीपीसी, पंजाब सरकार द्वारा दर्ज एफआईआर और गठित विशेष जांच टीम (एसआईटी) के खिलाफ खुलकर सामने आने से बच रही है, लेकिन धार्मिक मंचों के जरिये एफआईआर को रद्द करवाने और जांच को कमजोर करने का दबाव बना रही है।

इस मामले में अब तक कुल 16 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है, जिनमें से 10 आरोपियों की अग्रिम जमानत पहले ही खारिज हो चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इतने गंभीर आरोपों के बीच धार्मिक मंचों के माध्यम से जांच को प्रभावित करने की कोशिश संस्थागत पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। अब 28 दिसंबर की बैठक पर सभी की निगाहें टिकी हैं कि क्या वहां पंथ और मर्यादा के हित में ठोस निर्णय लिया जाएगा या केवल कानूनी कार्रवाई से बचने का रास्ता तलाशा जाएगा।

इधर, एसजीपीसी के कुछ सदस्यों ने दावा किया है कि इस मामले की जांच श्री अकाल तख्त साहिब की जांच कमेटी कर चुकी है और रिपोर्ट में इसे मनी लॉन्ड्रिंग व कर्मचारियों की लापरवाही तक सीमित बताया गया है। उनका कहना है कि इसे बेअदबी का मामला बताकर संगत को गुमराह किया जा रहा है और राजनीतिक दलों द्वारा एफआईआर की मांग करना तख्त की स्वतंत्रता को चुनौती देना है।

वहीं दूसरी ओर, सिख संगठनों का रोष लगातार बढ़ता जा रहा है। श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार कमेटी, सिख यूथ फेडरेशन और अन्य संगठनों ने आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग को लेकर पुलिस कमिश्नर को ज्ञापन सौंपा है। नेताओं का कहना है कि पांच वर्षों की लंबी लड़ाई के बाद जब हाईकोर्ट के आदेशों से एफआईआर दर्ज हुई है, तो अब तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी न होना पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

सिख नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह बरगाड़ी बेअदबी कांड में दोषियों को बचाने की कोशिश हुई थी, उसी तरह अब भी कुछ ताकतें 328 पावन स्वरूपों के मामले में जिम्मेदार लोगों को संरक्षण दे रही हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने सिख पंथ और प्रशासन दोनों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है, और आने वाले दिन तय करेंगे कि न्याय की दिशा में ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं।

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