हरदोई मे प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम से बदली प्रभा शुक्ला की तकदीर, छोटे कारोबार से बनीं सफल उद्यमी
हरदोई (आरएनआई) कहते हैं कि दृढ़ संकल्प, परिश्रम और सही मार्गदर्शन मिल जाए तो सफलता की राह स्वयं बन जाती है। जनपद हरदोई के विकास खण्ड हरियावां स्थित ग्राम हरियावां की निवासी प्रभा शुक्ला की कहानी इसी सत्य को चरितार्थ करती है। एक समय सामान्य गृहिणी के रूप में जीवनयापन करने वाली प्रभा आज एक सफल उद्यमी के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर चुकी हैं। उनकी यह उपलब्धि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) की सहायता और अपनी अथक मेहनत का परिणाम है।
प्रभा शुक्ला पहले छोटे स्तर पर आटा चक्की का संचालन करती थीं। सीमित संसाधनों और कम आय के कारण व्यवसाय का विस्तार कर पाना आसान नहीं था। इसी दौरान उन्हें खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग द्वारा संचालित प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम की जानकारी प्राप्त हुई। योजना ने उनके भीतर नए सपने और आत्मविश्वास का संचार किया। उन्होंने वर्ष 2021 में अपने व्यवसाय को बड़े स्तर पर स्थापित करने के लिए विभाग में आवेदन किया।
उनके प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने पर उन्हें 25 लाख रुपये का बैंक ऋण प्राप्त हुआ। साथ ही योजना के अंतर्गत 35 प्रतिशत मार्जिन मनी अनुदान के रूप में लगभग 8.75 लाख रुपये की सहायता भी प्रदान की गई। इस आर्थिक सहयोग ने उनके सपनों को साकार करने की मजबूत नींव रखी। उन्होंने आधुनिक मशीनों और बेहतर संसाधनों के साथ एक बड़े आटा कारखाने की स्थापना की।
व्यवसाय में आए इस बदलाव का असर शीघ्र ही दिखाई देने लगा। वर्ष 2021-22 में जहां उनका वार्षिक कारोबार लगभग 3 लाख रुपये था, वहीं योजना का लाभ मिलने के बाद यह तेजी से बढ़कर वर्ष 2022-23 में लगभग 40 लाख रुपये तक पहुंच गया। निरंतर परिश्रम, गुणवत्ता और ग्राहकों के विश्वास के बल पर उनका कारोबार आगे बढ़ता रहा और वर्ष 2024-25 में उन्होंने एक करोड़ रुपये के वार्षिक कारोबार का उल्लेखनीय आंकड़ा हासिल कर लिया।
प्रभा शुक्ला की सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण महिला सशक्तिकरण का भी प्रेरणादायी उदाहरण है। उनके आटा कारखाने से क्षेत्र के अनेक लोगों को रोजगार मिला है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है। आज उनका परिवार आर्थिक रूप से सशक्त और खुशहाल जीवन जी रहा है।
प्रभा शुक्ला बताती हैं कि सरकारी योजनाओं की जानकारी और उनका सही उपयोग जीवन की दिशा बदल सकता है। वह अन्य महिलाओं और युवाओं को भी स्वरोजगार अपनाने तथा सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित करती हैं।
उनकी कहानी इस बात का प्रमाण है कि अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि रोजगार सृजन कर समाज और देश के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम ने प्रभा शुक्ला को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं दी, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास, सम्मान और नई पहचान भी प्रदान की है। यह सफलता उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों को साकार करने का साहस रखती हैं।
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