भारत ने अलास्का में ट्रंप-पुतिन मुलाकात का किया स्वागत, कहा- संवाद से खुलेगी शांति की राह

विदेश मंत्रालय ने अलास्का शिखर सम्मेलन का स्वागत किया और अमेरिका तथा रूस के बीच हुई वार्ता को शांति की दिशा में अहम बताया। एमईए के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि वार्ता में हुई प्रगति की भारत सराहना करता है और आगे का रास्ता संवाद व कूटनीति से ही निकलेगा। 

Aug 16, 2025 - 20:38
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भारत ने अलास्का में ट्रंप-पुतिन मुलाकात का किया स्वागत, कहा- संवाद से खुलेगी शांति की राह

नई दिल्ली (आरएनआई) विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अमेरिका और रूस के बीच अलास्का में हुई शिखर वार्ता का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की यह पहल वैश्विक शांति की दिशा में एक अहम कदम है। जायसवाल ने कहा कि भारत इस वार्ता में हुई प्रगति की सराहना करता है और मानता है कि आगे का रास्ता केवल संवाद और कूटनीति से ही निकल सकता है।

रणधीर जायसवाल ने आगे कहा कि मौजूदा समय में पूरी दुनिया की नजर यूक्रेन युद्ध पर है और सभी चाहते हैं कि इस संघर्ष का जल्द से जल्द अंत हो। जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत की हमेशा से यही नीति रही है कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। उन्होंने दोहराया कि बातचीत और आपसी समझ ही शांति का सबसे बड़ा माध्यम है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की अलास्का में हुई शिखर वार्ता ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा। यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद पहली बार दोनों नेताओं की सीधी मुलाकात हुई। हालांकि बैठक को ‘उपयोगी’ बताते हुए भी ट्रंप ने यह साफ किया कि फिलहाल कोई बड़ा समझौता नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि हमने कुछ प्रगति की है, लेकिन अभी हम पूरी मंजिल तक नहीं पहुंचे हैं।

ट्रंप ने बातचीत को ‘बहुत सकारात्मक’ बताते हुए यह भी कहा कि अगले कदमों पर वे यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की और नाटो नेताओं से चर्चा करेंगे। वहीं पुतिन ने ट्रंप की ‘मित्रतापूर्ण’ भाषा और रूस के राष्ट्रीय हितों की समझ की तारीफ की। हालांकि, वार्ता से कोई ठोस घोषणा या लिखित समझौता नहीं निकल पाया।

ट्रंप ने स्पष्ट कहा कि अभी किसी बड़े समझौते पर मुहर नहीं लगी है। उन्होंने स्वीकार किया कि कई मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं और उन्हें दूर करने के लिए आगे और बातचीत करनी होगी। उन्होंने कहा कि हमने प्रगति की है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। जब तक सब कुछ तय नहीं होता, तब तक कोई डील नहीं मानी जाएगी।

वार्ता के बाद ट्रंप ने कहा कि चीन पर रूसी तेल खरीदने को लेकर टैरिफ फिलहाल टाल दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि आज की बातचीत के बाद मुझे फिलहाल इस बारे में सोचना नहीं पड़ रहा है। हालांकि, भारत पर उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की। अमेरिका ने पहले ही भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा रखा है, जिसमें से 25 प्रतिशत रूसी तेल आयात पर पेनल्टी है।

रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने ट्रंप की तारीफ करते हुए कहा कि बातचीत ‘दोस्ताना माहौल’ में हुई। उन्होंने कहा कि ट्रंप ने रूस के राष्ट्रीय हितों को समझा और सम्मान दिया। हालांकि, ट्रंप ने सार्वजनिक मंच से यूक्रेन में रूस के हमलों में नागरिकों की मौत पर कुछ नहीं कहा, जिस पर कई अंतरराष्ट्रीय हलकों में सवाल खड़े हो रहे हैं।

वार्ता के बाद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस केवल 15 मिनट चली, जिसमें दोनों नेताओं ने सामान्य कूटनीतिक बातें दोहराईं। किसी ठोस उपलब्धि या लिखित सहमति की घोषणा नहीं हुई। इससे साफ है कि दोनों पक्षों में अभी भी गहरे मतभेद कायम हैं और समझौते का रास्ता लंबा है।

ट्रंप ने संकेत दिया कि जल्द ही पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के बीच बैठक हो सकती है, जिसमें वे खुद भी शामिल हो सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि यह बैठक कब और कहां होगी। पुतिन ने जेलेंस्की से मुलाकात पर कोई टिप्पणी नहीं की। उन्होंने उम्मीद जताई कि यूक्रेन और यूरोपीय देश अमेरिका-रूस वार्ता को सकारात्मक रूप से देखेंगे और प्रगति में बाधा नहीं डालेंगे।

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