पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

याचिका में मस्जिद कमेटी प्रबंधन ने मांग की थी कि जिलाधिकारी को निर्देश दिया जाए कि यथास्थिति बरकरार रखी जाए। दरअसल जिस निजी कुएं की खुदाई की जा रही है, वह मस्जिद की सीढ़ियों के पास स्थित है। 

Jan 11, 2025 - 11:05
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

नई दिल्ली (आरएनआई) सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से चंडीगढ़ प्रशासन को चीफ जस्टिस के कोर्ट रूम के बाहर बरामदा बनाने के निर्देश पर रोक लगा दी। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने चंडीगढ़ प्रशासन की याचिका पर यह आदेश पारित किया। चंडीगढ़ प्रशासन का तर्क था कि इस तरह के निर्माण से चंडीगढ़ कैपिटल कॉम्प्लेक्स की यूनेस्को विरासत स्थिति प्रभावित होगी। हाईकोर्ट चंडीगढ़ कैपिटल कॉम्प्लेक्स का हिस्सा है। आदेश का पालन न करने पर चंडीगढ़ के मुख्य अभियंता को हाईकोर्ट की ओर से जारी अवमानना नोटिस पर भी सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी। पीठ ने आदेश दिया, बरामदा बनाने के निर्देश और मुख्य अभियंता के खिलाफ अवमानना नोटिस पर रोक रहेगी। कोर्ट ने प्रशासन की याचिका पर हाईकोर्ट और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस भी जारी किया है। पिछले साल 29 नवंबर को हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन को निर्देश दिया था कि वह दो हफ्ते के भीतर कोर्ट रूम नंबर 1 के सामने बरामदे का निर्माण शुरू करे और उसके बाद चार सप्ताह के भीतर निर्माण की प्रक्रिया पूरी करें। यह आदेश परिसर में बुनियादी ढांचे से संबंधित एक मामले में पारित किया गया था। चंडीगढ़ प्रशासन का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अथॉरिटी इमारत की अंतरराष्ट्रीय विरासत की स्थिति को लेकर चिंतित हैं। बरामदे का निर्माण हमारे लिए अहंकार का विषय नहीं बन सकता। मेहता ने कहा कि इसे यूनेस्को की तरफ से विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने संभल की शाही जामा मस्जिद के विवाद में उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। इस नोटिस में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से स्टेट्स रिपोर्ट मांगी है। संभल शाही जामा मस्जिद प्रबंधक कमेटी की याचिका पर यह नोटिस जारी किया गया है। याचिका में मस्जिद कमेटी प्रबंधन ने मांग की थी कि जिलाधिकारी को निर्देश दिया जाए कि यथास्थिति बरकरार रखी जाए। दरअसल जिस निजी कुएं की खुदाई की जा रही है, वह मस्जिद की सीढ़ियों के पास स्थित है। 

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की सदस्यता वाली पीठ ने प्रशासन को यह भी निर्देश दिया है कि वे नगर पालिका के नोटिस पर कार्रवाई न करें, जिसमें सार्वजनिक कुएं को हरि मंदिर बताया गया है और उसकी पूजा की इजाजत दी गई थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में पूजा पर रोक लगा दी है। हालांकि कुएं के सार्वजनिक इस्तेमाल की छूट है। संभल शाही जामा मस्जिद प्रबंधन कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। ट्रायल कोर्ट ने 19 नवंबर 2024 को मस्जिद के सर्वे का निर्देश दिया था। मस्जिद कमेटी की तरफ से वरिष्ठ वकील हुफैजा अहमदी सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए। वहीं वादी पक्ष की तरफ से वरिष्ठ वकील विष्णु शंकर जैन पेश हुए। जैन ने अदालत में कहा कि कुआं मस्जिद के बाहर स्थित है। वहीं अहमदी ने कहा कि कुआं आधा अंदर और आधा मस्जिद के बाहर है। अहमदी ने ये भी दावा किया कि कुआं मस्जिद के इस्तेमाल के लिए ही है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कुएं का इस्तेमाल अगर मस्जिद के बाहर से हो रहा है तो इसमें कोई आपत्ति नहीं है। 

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