ताशकंद समझौते के बाद लाल बहादुर शास्त्री की मौत: रहस्य जो आज भी अनसुलझा है

11 जनवरी 1966 की रात तत्कालीन सोवियत संघ के ताशकंद में अचानक देश के दूसरे प्रधानमंत्री रहे लाल बहादुर शास्त्री का निधन हो गया था। इसके बारे में तमाम सवाल आज भी खड़े किए जाते हैं।

Jan 11, 2025 - 14:00
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ताशकंद समझौते के बाद लाल बहादुर शास्त्री की मौत: रहस्य जो आज भी अनसुलझा है

नई दिल्ली (आरएनआई) देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की मौत आज भी एक राज है। 11 जनवरी 1966 की रात तत्कालीन सोवियत संघ के ताशकंद में अचानक उनका निधन हो गया था। इसके बारे में तमाम सवाल आज भी खड़े किए जाते हैं। बहुत से लोग यह कतई मानने के लिए तैयार नहीं होते हैं कि उनकी स्वाभाविक तौर पर दिल के दौरे से मौत हुई थी। ऐसे तमाम सवाल आज भी अनसुलझे हैं, जिनके जवाब आज तक नहीं मिल पाए हैं। 

तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री भारत और पाकिस्तान के बीच साल 1965 में शुरू हुए युद्ध को लेकर समझौते के लिए सोवियत संघ गए थे। वहां ताशकंद शहर में प्रधानमंत्री शास्त्री और पाकिस्तानी राष्ट्रपति अयूब खान के साथ 10 जनवरी 1966 को ऐतिहासिक समझौता हुआ। इस समझौते के लिए लाल बहादुर शास्त्री पर काफी दबाव भी था। 

लाल बहादुर शास्त्री के साथ ताशकंद दौरे पर गए वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर ने लिखा है कि 10 जनवरी की देर रात अचानक किसी ने उनका दरवाजा खटखटाया। नींद खुली और दरवाजा खोला तो बाहर एक महिला खड़ी थी। उसने कहा था कि प्रधानमंत्री शास्त्री मौत का सामना कर रहे हैं। कपड़े बदलकर वह लाल बहादुर शास्त्री के कमरे की ओर बढ़े तो सोवियत संघ के प्रधानमंत्री अलेक्सेई कोसीगिन उनके कमरे के बाहर बरामदे में खड़े दिखे।  उन्होंने दूर से ही हाथ हिलाकर बताया कि लाल बहादुर शास्त्री का निधन हो चुका है। 

कुलदीप नैयर के मुताबिक, शास्त्री के सम्मान में एक स्वागत समारोह का आयोजन ताशकंद में किया गया था। वहां से वह रात में करीब 10 बजे अपने कमरे में पहुंचे थे। उनके निजी सहायक रामनाथ ने खाना परोसा। यह खाना सोवियत संघ में तत्कालीन भारतीय राजदूत टीएन कौल के घर से आया था। कौल के शेफ जान मुहम्मद ने भोजन पकाया था। लाल बहादुर शास्त्री ने थोड़ा सा ही खाना खाया था। इसके बाद रामनाथ ने उनको दूध दिया। दूध पीकर वह चहलकदमी करने लगे। फिर लाल बहादुर शास्त्री के मांगने पर थर्मस से पानी भी दिया। आधी रात होते-होते उन्होंने रामनाथ को सोने के लिए उनके कमरे में भेज दिया। सुबह जल्दी उनको काबुल जाना था। 

रात करीब 1:20 बजे लाल बहादुर शास्त्री ने निजी सचिव के कमरे का दरवाजा खटखटाया और डॉक्टर के बारे में पूछा। वह काफी तकलीफ में थे। उनको भयंकर खांसी आने लगी थी। निजी सहायकों ने उनको बिस्तर पर लेटाया और पानी दिया। डॉक्टर बुलाए गए पर जब तक इलाज शुरू हो पाता रात करीब 1:32 बजे उनका निधन हो गया। लाल बहादुर शास्त्री को घातक दिल का दौरा पड़ा था। इस बात से कई लोग सहमत नहीं थे। 

लाल बहादुर शास्त्री के एक और निजी सचिव जगन्नाथ सहाय ने कुलदीप नैयर को इसके बारे में बताया था कि आधी रात के करीब लाल बहादुर शास्त्री ने उनका दरवाजा खटखटाया और पानी मांगा था। दो स्टेनोग्राफर्स और खुद जगन्नाथ ने सहारा देकर उनको वापस उनके कमरे तक पहुंचाया था। लाल बहादुर शास्त्री के चिकित्सक डॉ. आरएन चुघ के मुताबिक लाल बहादुर शास्त्री के लिए यही समय सबसे घातक साबित हुआ। 

कुलदीप नैयर लिखते हैं कि भारत लौटने पर लाल बहादुर शास्त्री की पत्नी ललिता शास्त्री ने पूछा था कि उनका पार्थिव शरीर नीला क्यों था? तब नैयर ने बताया था कि पार्थिव शरीर को सुरक्षित रखने को रासायनिक पदार्थ लगाने के कारण ऐसा होता है।  ललिता शास्त्री ने यह सवाल भी किया था कि लाल बहादुर शास्त्री के शरीर पर कट के निशान कैसे आए? नैयर लिखते हैं कि कट के बारे में मुझे कुछ भी पता नहीं था।  सबसे आश्चर्यजनक बात यह थी कि ताशकंद और दिल्ली में लाल बहादुर शास्त्री का पोस्टमार्टम तक नहीं किया गया। 

उनकी मौत के सालों बाद उनके बेटे सुनील शास्त्री ने केंद्र सरकार से मांग की थी कि उनकी रहस्यमय मौत की जांच कर खुलासा किया जाए। सुनील शास्त्री ने यह भी कहा था कि उनकी मां ललिता शास्त्री का आरोप था कि उन्हें जहर दिया गया था। वैसे लाल बहादुर शास्त्री की मौत की जांच के लिए कई आयोग और समितियां बनाई गईं पर कोई नतीजा नहीं निकला। ताशकंद में लाल बहादुर शास्त्री की मौत पहेली ही बनी हुई है। 

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