तमिलनाडु में नहीं लागू होगी पीएम विश्वकर्मा योजना, सीएम स्टालिन का आरोप- यह जातिगत भेदभाव पर आधारित

केंद्र की मोदी सरकार ने बीते साल अपनी महत्वकांक्षी पीएम विश्वकर्मा योजना की शुरुआत की थी। इस योजना के तहत भारत सरकार देश के पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को उन्नत ट्रेनिंग देकर उन्हें सस्ती ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध करा रही है।

Nov 28, 2024 - 09:00
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तमिलनाडु में नहीं लागू होगी पीएम विश्वकर्मा योजना, सीएम स्टालिन का आरोप- यह जातिगत भेदभाव पर आधारित

चेन्नई (आरएनआई) तमिलनाडु की डीएमके सरकार ने राज्य में केंद्र की पीएम विश्वकर्मा योजना को राज्य में लागू करने से इनकार कर दिया है। तमिलनाडु सरकार का कहना है कि वे योजना को इसके मौजूदा स्वरूप में लागू नहीं कर सकते हैं क्योंकि पीएम विश्वकर्मा योजना अपने मौजूदा स्वरूप में जातिगत भेदभाव को बढ़ावा देती है। डीएमके सरकार ने कहा कि वे पीएम विश्वकर्मा योजना की जगह दूसरी योजना लाएंगे, जो ज्यादा समावेशी और बेहतर होगी।

तमिलनाडु सीएम एमके स्टालिन ने केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग मंत्री जीतनराम मांझी को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में स्टालिन ने पीएम विश्वकर्मा योजना में कुछ बदलाव करने की मांग की है। स्टालिन ने लिखा कि यह योजना जातिगत आधार पेशे की परंपरा को मजबूत करके जातीय भेदभाव को बढ़ावा देती है। तमिलनाडु सरकार ने इसे लेकर एक समिति गठित की थी। इस समिति ने अपनी रिपोर्ट में कुछ बदलाव सुझाए हैं, जिनके मुताबिक पीएम विश्वकर्मा योजना में आवेदक के परिवार का पारंपरिक तौर पर उस पेशे से जुड़ा होना जरूरी है। इसकी बजाय कोई भी व्यक्ति इस योजना के तहत आवेदन करने का योग्य होना चाहिए। 

साथ ही योजना के आवेदकों की न्यूनतम उम्र सीमा को बढ़ाकर 35 साल करने की मांग की गई है और साथ ही लाभार्थी का सत्यापन करने का अधिकार ग्राम पंचायत प्रमुख की जगह ग्राम प्रशासन अधिकारी को दिया जाना चाहिए। स्टालिन ने पत्र में ये भी बताया कि वह इस मुद्दे पर पहले भी प्रधानमंत्री को पत्र लिख चुके हैं और अपनी चिंता जाहिर कर चुके हैं।

केंद्र की मोदी सरकार ने बीते साल अपनी महत्वकांक्षी पीएम विश्वकर्मा योजना की शुरुआत की थी। इस योजना के तहत भारत सरकार देश के पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को उन्नत ट्रेनिंग देकर उन्हें सस्ती ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध करा रही है। केंद्र सरकार ने इस योजना के लिए 13 हजार करोड़ का बजट तय किया है। फिलहाल इस योजना को पांच साल के लिए लागू किया गया है। इसके तहत सरकार कारीगरों जैसे बुनकर, लोहार, कुम्हार, मूर्तिकार, कपड़े धोने वाले श्रमिक, दर्जी, राजमिस्त्री आदि को ट्रेनिंग देगी। ट्रेनिंग के दौरान कारीगरों को हर दिन 500 रुपये का स्टाइपेंड भी दिया जाएगा। साथ ही ट्रेनिंग के बाद उन्हें अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए तीन लाख रुपये तक का लोन बिना गारंटी, डिजिटल लेन-देन की जानकारी, टूलकिट, उत्पादों के लिए क्वालिटी सर्टिफिकेशन, ब्रांडिंग और विज्ञापन आदि की भी जानकारी देगी। 

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