'कश्मीर में लोग सरकार के भरोसे गए और उन्हें भगवान के भरोसे छोड़ दिया' — लोकसभा में प्रियंका गांधी का हमला

Jul 29, 2025 - 14:58
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'कश्मीर में लोग सरकार के भरोसे गए और उन्हें भगवान के भरोसे छोड़ दिया' — लोकसभा में प्रियंका गांधी का हमला

नई दिल्ली (आरएनआई) आज संसद के मानसून सत्र का सातवां दिन है। अमित शाह ने लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर सदन को संबोधित किया और विपक्ष को आड़े हाथों लिया। अमित शाह ने बताया कि पहलगाम हमले के आरोपी तीनों आतंकी ऑपरेशन महादेव में मारे गए हैं। इस मुद्दे पर पहले दिन की चर्चा के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सरकार का पक्ष रखा। इसके अलावा विपक्षी दलों ने सुरक्षा में चूक और जवाबदेही को लेकर सत्ताधारी दल को कटघरे में खड़ा किया। 

प्रियंका गांधी ने पहलगाम आतंकी हमले के जिम्मेदार टीआरएफ को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि 'टीआरएफ ने कई आतंकी हमले किए, लेकिन 2023 में उसे आतंकी संगठन घोषित किया गया। एक संगठन इतना बड़ा हमला करता है और सरकार को पता नहीं चला? हमारी एजेंसियां हैं, इनकी जिम्मेदारी कौन लेगा, क्या किसी ने इस्तीफा दिया? खुफिया विभाग गृह मंत्रालय के तहत आता है, क्या गृह मंत्री ने इसकी जिम्मेदारी ली। इतिहास की बात आप करते हैं, मैं वर्तमान की बात करूंगी। 11 साल से तो आपकी सरकार है, आपकी कोई जिम्मेदारी है कि नहीं।'

लोकसभा में प्रियंका गांधी ने ऑपरेशन सिंदूर पर बोलते हुए कहा कि सबसे पहले मैं उन सैनिकों, जवानों को नमन करना चाहती हूं, जो दुर्गम क्षेत्रों में हमारी सीमाओं की रक्षा करते हैं। 1948 से लेकर अब तक हमारे देश की अखंडता की रक्षा करने में उनका बड़ा योगदान है। हमारी आजादी अहिंसा के आंदोलन से हासिल हुई, लेकिन उसे कायम रखने में हमारी सेना का बहुत बड़ा योगदान है। कल मैं सदन में सभी के भाषण सुन रही थी। रक्षा मंत्री के भाषण को सुनते हुए एक बात मुझे खटकी कि सारी बातें कर ली। इतिहास का पाठ भी पढ़ा दिया, लेकिन एक बात छूट गई कि 22 अप्रैल 2025 को जब 26 नागरिकों को उनके परिजनों के सामने खुलेआम मारा गया तो ये हमला कैसे हुआ क्यों हुआ?

आतंकी बैसारण घाटी में क्या कर रहे थे? कुछ समय से हमारी सरकार प्रचार कर रही थी कि कश्मीर में शांति है। प्रधानमंत्री ने भी कहा कि वहां अमन चैन और शांति का वातावरण है। इसी बीच कानपुर के नौजवान शुभम द्विवेदी ने तय किया कि वे कश्मीर जाएंगे। छह महीने पहले ही उनकी शादी हुई थी। 22 अप्रैल 2025 को बैसारण घाटी में मौसम अच्छा था। हर रोज हजारों लोग पहुंचते थे तो उस दिन भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। शुभम अपनी पत्नी के साथ एक स्टॉल पर खड़े थे। तभी चार आतंकी जंगल से निकलते हैं और शुभम को उनकी पत्नी के सामने मार देते हैं। इसके बाद एक घंटे तक लोगों को चुन-चुनकर मारते हैं। शुभम की पत्नी घबराकर वहां से भागती है तो वहां पता चलता है कि तमाम लोग भाग रहे थे। जब एक घंटे तक लोगों को चुन-चुनकर मारा जा रहा था तो उन्हें एक सुरक्षाकर्मी नहीं दिखा। शुभम की पत्नी ने कहा- मैंने अपनी दुनिया को अपनी आंखों के सामने खत्म होते देखा। एक सुरक्षाकर्मी नहीं था। मैं ये कह सकती हूं कि देश ने, सरकार ने हमें वहां पर अनाथ छोड़ दिया। सुरक्षा वहां क्यों नहीं थी? क्या सरकार को मालूम नहीं था कि हजारों लोग वहां जाते हैं। लोग सरकार के भरोसे गए और सरकार ने उन्हें भगवान भरोसे छोड़ दिया। ये किसकी जिम्मेदारी किसकी थी? 

अखिलेश यादव ने लोकसभा में कहा कि 'जिस तरह से हमारी सेना ने मुकाबला किया है। सरकार को ये भी स्वीकार करना होगा कि सीजफायर के बाद भी ड्रोन आ रहे थे। सीजफायर किसके दबाव में किया गया। सीजफायर का एलान सरकार की तरफ से नहीं आया था। सोशल मीडिया से आया था। हमारे देश का क्षेत्रफल 2014 में कितना था और आज कितना है, ये देश को बताया जाना चाहिए। हमारे देश को पाकिस्तान से तो खतरा है ही, लेकिन असली खतरा चीन से है और हमारी चीन से मुकाबले की क्या तैयारी है।' 

राज्यसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान राजनाथ सिंह ने बताया कि 'ऑपरेशन महादेव में मारे गए आतंकी वही हैं, जिन्होंने पहलगाम में आतंकी हमला किया। फोरेंसिक जांच से भी पुष्टि हो गई है कि ये तीनों वही आतंकी हैं। ऑपरेशन सिंदूर आतंकवाद के खिलाफ हमारी नीति का प्रभावी प्रदर्शन था। 22 अप्रैल 2025 को आतंकियों ने 26 निर्दोष लोगों की हत्या कर दी। आतंकियों ने लोगों का धर्म पूछकर लोगों को मारा। सीमापार से आतंकवाद के जरिए भारत को तोड़ने की लगातार कोशिश हो रही। इसके बाद पीएम मोदी ने तीनों सेनाओँ के प्रमुखों के साथ बैठक की और उन्हें भारत के निर्णायक जवाब की पूरी छूट दी ताकि आतंक के आकाओं को स्पष्ट संदेश चला जाए कि भारत कठोर कार्रवाई करेगा और हर उस हद तक जाएगा, जो जरूरी होगा। ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम देने से पहले हमारी सेनाओं हर पहलू पर गहराई से अध्ययन किया। जिसमें आतंकियों को निशाना बनाया जाए और आम नागरिकों को कोई नुकसान न होने पाए। इस कार्रवाई में 100 से अधिक आतंकी और उनके हैंडलर मारे गए हैं।'

गृह मंत्री ने पहलगाम आतंकी हमले को खुफिया विभाग की चूक माना, लेकिन सरकार को ये बताना चाहिए कि ये चूक क्यों हुई? ये सरकार की विफलता है। सांसदों ने कई बार ये सवाल पूछा कि संघर्षविराम किसके कहने पर रोका गया। एक तरफ आजादी का ढिंढोरा पीटा जा रहा है और दूसरी तरफ हमारी संप्रभुता पर हमला हो रहा है। समाजवादी सरकारों ने हमेशा बताया है कि असली चुनौती कहां से मिल रही है। हमारी सीमाओं का अतिक्रमण हो रहा है। पाकिस्तान के पीछे कौन है? हमें चीन से बड़ा खतरा है। सरकार को आर्थिक नीतियों को मजबूत करने पर फोकस करना चाहिए। आर्थिक मामलों में सरकार पूरी तरह से फेल हो रही है। भ्रष्टाचार बढ़ रहा है। सरकार को अपनी राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक नीतियों पर जरूर पुनरीक्षण करना जरूरी है। पाकिस्तान की सीमा से आतंकवाद का खतरा रहता ही है, लेकिन दूसरी सीमाओं से भी लगातार खतरा है।

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