ओडिशा: यौन उत्पीड़न से त्रस्त छात्रा ने लगाई थी आग, तीन दिन मौत से जूझने के बाद निधन
ओडिशा में यौन उत्पीड़न और आरोपों पर कोई कार्रवाई न होने से आहत होकर आत्मदाह करने वाली छात्रा की इलाज के दौरान मौत हो गई। वह तीन दिन से जिंदगी और मौत से लड़ रही थी। छात्रा की मौत पर सीएम माझी ने दुख जताया है। साथ ही उन्होंने कहा है कि मामले में किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा। सभी को कड़ी सजा मिलेगी।
भुवनेश्वर (आरएनआई) ओडिशा के बालासोर स्थित फकीर मोहन स्वायत्तशासी महाविद्यालय में यौन उत्पीड़न से क्षुब्ध होकर आत्मदाह करने वाली छात्रा का निधन हो गया। उसने सोमवार देर रात एम्स भुवनेश्वर में अंतिम सांस ली। छात्रा 95 प्रतिशत जली अवस्था में एम्स लाई गई थी। जहां तीन दिनों तक उसका इलाज चला, लेकिन लाख कोशिशों के बाद भी उसे बचाया नहीं जा सका। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने उसके निधन पर दुख जताया है।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने बालासोर छात्रा आत्मदाह मामले की पीड़िता के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि एफएम ऑटोनॉमस कॉलेज की छात्रा की मौत की खबर सुनकर मुझे गहरा दुख हुआ है। सरकार द्वारा सभी जिम्मेदारियों को निभाने और विशेषज्ञ चिकित्सा दल के अथक प्रयासों के बावजूद, पीड़िता की जान नहीं बचाई जा सकी। मैं उनकी दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता हूं और भगवान जगन्नाथ से उनके परिवार को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना करता हूं। मैं मृतक छात्रा के परिवार को आश्वस्त करता हूं कि इस मामले में सभी दोषियों को कानून के अनुसार कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी। इसके लिए मैंने व्यक्तिगत रूप से अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। सरकार परिवार के साथ पूरी तरह खड़ी है।
ओडिशा की उप-मुख्यमंत्री प्रावती परिदा ने इस बारे में जानकारी दी। वे एम्स भुवनेश्वर पहुंचीं थीं। उन्होंने बताया कि पीड़िता की रात लगभग 11:45 बजे मृत्यु हो गई। डॉक्टर पिछले तीन दिनों से उसे बचाने की पूरी कोशिश कर रहे थे। सरकार इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी।
बालासोर छात्रा आत्मदाह मामले की पीड़िता की मौत के बाद तनाव बढ़ गया है। विपक्षी बीजद के कार्यकर्ता विरोध पर उतर आए हैं। जब पीड़िता के पार्थिव शरीर को एम्स के पोस्टमॉर्टम सेंटर ले जाया जा रहा था उस समय बीजद कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया।
फकीर मोहन (स्वायत्त) कॉलेज, बालासोर के एकीकृत बीएड कार्यक्रम की द्वितीय वर्ष की छात्रा ने शनिवार 12 जुलाई को एचओडी पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग करते हुए खुद को आग लगा ली थी। छात्रा ने आरोप लगाया था कि शिक्षक ने उसका यौन और मानसिक उत्पीड़न किया था।
घटना से पहले छात्रा ने प्रिंसिपल दिलीप घोष के पास शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन उन्होंने उससे शिकायत वापस लेने को कहा। प्रिंसिपल दिलीप घोष ने खुद इसे स्वीकार किया था। उन्होंने कहा था 'छात्रा मेरे पास आई थी और शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई चाहती थी। मैंने उसे समझाया, क्योंकि वह तनाव में थी। उसने 30 जून को शिकायत दर्ज कराई थी और आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) की जांच चल रही थी।'
छात्रा द्वारा आत्मदाह किए जाने के बाद ओडिशा सरकार के उच्च शिक्षा विभाग ने मामले के प्रथम दृष्टया साक्ष्य के आधार पर शैक्षिक अध्ययन विभाग की सहायक प्रोफेसर (स्टेज-I) समीरा कुमार साहू को निलंबित कर दिया। इसके अलावा एफएम (ऑटो) कॉलेज, बालासोर के सहायक प्रोफेसर और प्राचार्य दिलीप कुमार घोष को भी निलंबित कर दिया है। पत्र में लिखा है, 'सरकार का मानना है कि दिलीप कुमार घोष ने मामले को ठीक से नहीं संभाला है। उन्होंने कॉलेज के प्राचार्य के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं किया है। उन्हें ओडिशा सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1962 के नियम 12 के उप-नियम (2) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।'
बाद में ओडिशा के उच्च शिक्षा विभाग ने एफएम ऑटो कॉलेज की सहायक प्रोफेसर समीरा कुमार साहू के खिलाफ कथित उत्पीड़न मामले की गहन जांच के लिए शनिवार को एक समिति का गठन किया था। साहू को बालासोर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। इसके अलावा, राज्य में व्यापक विरोध को देखते हुए सोमवार को एफएम कॉलेज के निलंबित प्राचार्य दिलीप घोष को भी गिरफ्तार किया गया। जहां उसे एसडीजेएम कोर्ट में पेश किया गया जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
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