सातवां उर्से नूरुल अस्फ़िया अक़ीदत से मनाया गया
शाहाबाद हरदोई । नगर के मोहल्ला कटरा नूरी नगर में तीन रोज़ा उर्स नूरुल अस्फ़िया अक़ीदत और एहतराम के साथ मनाया गया। उर्स बड़ी दरगाह कुतबे आलम नूरुल औलिया बरैची शरीफ़ के जानशीन सज्जादा मौलाना मुफ़्ती हजरत सैय्यद अजीमुद्दीन हादी जीलानी की सरपरस्ती में और नूरुल अस्फ़िया नूर मोहम्मद इराकी नूरी मियां के जानशीन व सज्जादा सूफ़ी आयतुल्लाह शान मोहम्मद इराकी नूरी की निगरानी में संपन्न हुआ। सिलसिला ए क़ादरिया मुजद्दिया की मारूफ दरगाह हज़रत शाह दरगाही महबूबे इलाही रामपुर से सज्जादा नशीन हजरत सैय्यद शाहिद मियां और उनके बेटे सैय्यद फज मियां और दरगाह हजरत अहमद अली शाह दादा मियाँ भटपुरा, शरीफ रामपुर के सज्जादा नशीन सैय्यद जुबैर मियां और दरगाह फारूक मियां के सज्जादा नशीन हजरत फिदा अली मियां रामपुर, मौलाना आरिफ जमाली व खानकाहे आरिफिया मझगवां शरीफ की शहजादी मोहतरमा फरोजा आरफीआ और खानकाहे गुलजारिया, रामपुर से जनाब नूर मोहम्मद और दरगाह हजरत मौलाना मोहम्मद बशीर मियां बरेली के मुतवल्ली हाफि कारी हजरत मुकीम मियां,मुंबई से सैय्यद शाहिद मियां मेहमाने खुसूसी के तौर पर तशरीफ लाए। मिलाद शरीफ से शुरुआत की गई,फिर शाम से मध्य रात्रि तक महफिले समा हुई जिसमें मशहूर मारूफ ऑल इंडिया कव्वाल सरदार हसन मौलाई रामपुरी ने अपनी कव्वाली से लोगों के दिलों को मुनव्वर किया। उसके बाद मध्य रात्रि में गस्ल नूरुल अस्फिया हुआ। दूसरे दिन खानकाहे नूरिया बैतूननूर मोहल्ला बरुआ बाजार से जुलूस ए चादर लगभग प्रातः 10:00 बजे रवाना हुई। जुलूस में नात व मनकवत पढ़ते हुए दरगाह नूरुल अस्फिया पहुंचकर चादर व फूल पेश किए गए। उसके बाद 2:15 बजे पहला क़ुल शरीफ हुआ। फिर लंगरे आम शाम तक चलता रहा और शाम को ऑल इंडिया तरही नातिया व मनकबती मुशायरा कुरान शरीफ की तिलावत से शुरू हुआ। मकामी व बैरूनी शायरों ने अपने-अपने कलाम पढ़कर महफिल को नूरानी बनाया। जिसमें शायर मौलाना राशिद क़दीरी रामपुर से तशरीफ़ लाए और सलीम ताबिश,शकील ग्यावी लखनवी व इकबाल अक़रम वारसी लखीमपुरी, असगर बिलग्रामी, और शराफत दीरी पीलीभीत से तशरीफ लाए रेहान क़ादरी व कासिम वारसी शाहजहांपुरी,साबिर वारसी शाहजहांपुरी,अजहर वारसी,हाफिज आशिकुल कादरी, अनस रज़ा वारसी,व नात खां मौलाना मुर्तजा इलाहाबादी,अलीशेर व नदीम रामपुरी ने कलाम पढ़े उसके बाद अल्लामा मौलाना मुफ़्ती हज़रत हबीबुर्रहमान अम्बेडकरनगर ने महफ़िल में खिताब फरमाया सूफी इरफ़ान मोहम्मद नूरी और सूफ़ी इमरान मोहम्मद नूरी,सूफ़ी मोहम्मद शोएब नूरी,सूफ़ी मोहम्मद शफ़ी नूरी चिरागे शाहाबाद,सूफ़ी हाजी मुसर्रत हुसैन नूरी, सूफी सूफ़ी फरोग मोहम्मद इराकी, सूफ़ी सिराजुद्दीन इराकी, सूफ़ी मेहराजुद्दीन इराकी, सूफ़ी सलाहुद्दीन इराकी,सूफ़ी गयासुद्दीन इराकी,सूफ़ी अलाउद्दीन इराकी ने आए हुए ज़ायरीनों की देखभाल की! अगले दिन शुक्रवार को दोपहर में चादर पाशी व गुलपोशी की गई उसके बाद सैय्यद अजीमुद्दीन हादी मियां ने तकरीर की और दीन व दुनिया के बारे में समझाया और सातवा उर्स नूरुल अस्फ़िया मे कहा अल्लाह और नबी के बताए हुए काम करो जिससे तुम्हारी दुनियावी जिंदगी बेहतर होगी और आखिरत भी अच्छी होगी! उसके बाद आख़िरी बड़ा क़ुल शरीफ़ हुआ जिसमें हादी मियां ने लोगों की बेहतर जिंदगी और भाईचारा एकता खुशहाली और मुल्क में अमानो चैन सलामती की दुआ की उसके बाद लंगर आम शाम तक चलता रहा देवेंद्र प्रताप सिंह दीपू, शिव चंद्रा वर्मा, डॉक्टर मजहरूल हसन खान उर्फ पप्पू भाई लखनऊ,विवेक गुप्ता कन्नौज ,जीशान खान कायमगंज, किशन पाठक जी उनके बेटे अमित पाठक उन्नाव,सहित दूर दराज़ से काफ़ी तादात में लोगों ने शिरकत की प्रशासन ने पूरी जिम्मेदारी के साथ उर्स कमेटी का सहयोग किया उर्स में आए हुए तमाम जायरीनों का सूफ़ी आयतुल्लाह शान मोहम्मद नूरी इराक़ी ने उर्स ए पाक की मुबारक बाद पेश की और तहेदिल से शुक्रिया अदा किया।
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