‘कई राज्य नहीं सौंपना चाहते स्थानीय निकायों को अधिकार’ : ईएसी-पीएम प्रमुख महेंद्र देव

Nov 1, 2025 - 13:24
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‘कई राज्य नहीं सौंपना चाहते स्थानीय निकायों को अधिकार’ : ईएसी-पीएम प्रमुख महेंद्र देव

नई दिल्ली (आरएनआई) – प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के चेयरमैन एस. महेंद्र देव ने कहा है कि भारत को सच्चे अर्थों में समावेशी विकास के लिए अधिक विकेंद्रीकरण की आवश्यकता है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि कई राज्य सरकारें अभी भी स्थानीय निकायों और पंचायतों को अधिकार देने में हिचकिचा रही हैं, जिससे जमीनी स्तर पर शासन की प्रभावशीलता कम हो रही है।

महेंद्र देव ने कहा कि “भारत में विकेंद्रीकरण की प्रक्रिया अभी भी धीमी है। चीन और अमेरिका जैसे देशों में स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार काफी अधिक हैं, जबकि भारत में राज्यों द्वारा स्थानीय संस्थाओं को अधिकार देने में पर्याप्त प्रगति नहीं हुई है।”

उन्होंने यह टिप्पणी रॉहिणी नैयर पुरस्कार वितरण समारोह में दी, जहां उन्होंने यह भी कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र को सशक्त करने के लिए पंचायतों और स्थानीय निकायों को अधिक निर्णय लेने की शक्ति दी जानी चाहिए। उनके अनुसार, “जब तक निर्णय स्थानीय जरूरतों के अनुरूप नहीं लिए जाएंगे, तब तक सतत विकास संभव नहीं है।”

महेंद्र देव ने उदाहरण देते हुए कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) जैसी योजनाओं के तहत पंचायतों की भागीदारी ने ग्रामीण मजदूरी में वृद्धि की और जमीनी लोकतंत्र को मजबूत बनाया। उन्होंने कहा कि “MGNREGA ने यह साबित किया है कि जब निर्णय स्थानीय निकायों के माध्यम से लिए जाते हैं, तो उसका लाभ सीधे जनता तक पहुंचता है।”

उन्होंने यह भी बताया कि तकनीक का उपयोग कृषि क्षेत्र में उत्पादकता और मजदूरी दोनों बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है। डिजिटल नवाचार, डेटा आधारित निर्णय और स्थानीय योजना निर्माण से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी जा सकती है।

समारोह में पुणे की सामाजिक उद्यमी विद्या परशुरमकर को चौथा रॉहिणी नैयर पुरस्कार प्रदान किया गया। उन्हें यह सम्मान पोषण को सुलभ, टिकाऊ और सामुदायिक रूप देने के उनके नवाचारपूर्ण कार्यों के लिए दिया गया। वे एग्रोजी ऑर्गेनिक्स और उसके प्रमुख प्रोजेक्ट ‘मिलेट्स नाउ’ का नेतृत्व करती हैं।

आईआईटी खड़गपुर से फूड टेक्नोलॉजी में एम.टेक. करने वाली विद्या परशुरमकर ने पारंपरिक खाद्य पदार्थों को आधुनिक पोषण समाधानों में रूपांतरित करने का सफल प्रयास किया है।
यह पुरस्कार 2022 में प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और प्रशासक रॉहिणी नैयर की स्मृति में शुरू किया गया था। इसमें 10 लाख रुपये की नकद राशि, एक प्रमाणपत्र, और ट्रॉफी प्रदान की जाती है।

महेंद्र देव ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि “भारत का भविष्य तभी उज्ज्वल होगा जब शासन की शक्ति गाँव और समुदाय तक पहुंचेगी। सशक्त स्थानीय निकाय ही सशक्त भारत की नींव हैं।

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