'सियासत में आप तुनक मिजाज नहीं हो सकते', केंद्रीय मंत्री की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री एल. मुरुगन की आपराधिक मानहानि याचिका पर अहम टिप्पणी की है।मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने केंद्रीय मंत्री से कहा, 'राजनीति में आप तुनक मिजाज नहीं हो सकते।

Sep 21, 2024 - 13:31
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'सियासत में आप तुनक मिजाज नहीं हो सकते', केंद्रीय मंत्री की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

नई दिल्ली (आरएनआई) सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री एल. मुरुगन की आपराधिक मानहानि याचिका पर अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने मुरुगन के खिलाफ चल रही आपराधिक मानहानि कार्यवाही से संबंधित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि राजनीति में आप "तुनक मिजाज" नहीं हो सकते।

5 सितंबर, 2023 के मद्रास  हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए मुरुगन ने पिछले साल शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। जिसमें हाईकोर्ट ने दिसंबर 2020 की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनके कथित विवादस्पद बयानों को लेकर चेन्नई स्थित मुरासोली ट्रस्ट द्वारा दायर शिकायत को रद्द करने से इनकार कर दिया था।

पिछले साल 27 सितंबर को केंद्रीय मंत्री की याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चेन्नई की एक विशेष अदालत में लंबित मुरुगन के खिलाफ कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर ट्रस्ट से जवाब मांगा था।

न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ के समक्ष शुक्रवार को यह मामला जब सुनवाई के लिए आया, तो मुरुगन की ओर से पेश हुए वकील ने कहा,  इस मामले में मानहानि का सवाल ही नहीं उठता है?  वहीं ट्रस्ट की ओर से पेश हुए वकील ने मामले में स्थगन की मांग की। मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने केंद्रीय मंत्री से कहा, 'राजनीति में आप तुनक मिजाज नहीं हो सकते।' इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिवादी के वकील के अनुरोध पर चार सप्ताह बाद सुनवाई की तारीख तय की है। 

इससे पहले मुरुगन ने अपने खिलाफ शुरू की गई कार्यवाही को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इस मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि ट्रस्ट के अनुसार, मुरुगन ने मुरासोली ट्रस्ट की प्रतिष्ठा को नीचा दिखाने और उसे कलंकित करने के उद्देश्य से बयान दिए थे। हाईकोर्ट ने कहा था कि,  अदालत याचिका रद्द करने पर विचार करते समय मामले के गुण-दोष या विवादित तथ्यों के प्रश्नों पर विचार नहीं कर सकता। कोर्ट को केवल शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर ही आगे बढ़ना है और प्रथम दृष्टया यह पता लगाना है कि अपराध क्या है?

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