व्हीलचेयर पर डटे जज़्बे को सलाम: एएसआई भूपेंद्र सिंह सेंगर का अदम्य साहस बना मिसाल
गुना (आरएनआई) कहते हैं कि हौसले मजबूत हों तो हालात भी घुटने टेक देते हैं। मध्यप्रदेश पुलिस के एएसआई भूपेंद्र सिंह सेंगर इसकी जीवंत मिसाल हैं। गंभीर बीमारी के कारण रीढ़ की हड्डी ने साथ छोड़ दिया और वे चलने-फिरने में असमर्थ हो गए, लेकिन उनका जज्बा आज भी उतना ही मजबूत है जितना वर्दी पहनने के पहले दिन था।
स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के चलते बिस्तर तक सीमित हो जाने के बावजूद भूपेंद्र सिंह ने हार नहीं मानी। व्हीलचेयर पर बैठकर भी वे अपने कर्तव्यों के प्रति पूरी निष्ठा से जुटे हैं। शहरभर में लगे सीसीटीवी कैमरों की निगरानी के माध्यम से वे अपराधों और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखते हैं। कई जटिल और उलझे मामलों को सुलझाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई है। दर्द और शारीरिक तकलीफों के बावजूद उनका समर्पण पुलिस सेवा के प्रति कम नहीं हुआ।
इस संघर्ष भरे दौर में उनके परिवार ने भी उनका मजबूत सहारा बनकर साथ दिया। उनके बच्चों और धर्मपत्नी ने हर कदम पर हौसला बढ़ाया, जिससे वे मानसिक रूप से मजबूत बने रहे और ड्यूटी के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते रहे।
उनकी इसी अदम्य इच्छाशक्ति और कर्तव्यनिष्ठा को सम्मान देते हुए हाल ही में एक समारोह में उन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया गया। मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल और एसपी अंकित सोनी स्वयं उनके पास व्हीलचेयर तक पहुंचे और उन्हें सम्मान प्रदान किया। यह दृश्य न केवल भावुक करने वाला था, बल्कि यह संदेश भी दे गया कि सच्ची सेवा भावना किसी शारीरिक बाधा की मोहताज नहीं होती।
एएसआई भूपेंद्र सिंह सेंगर जैसे जांबाज पुलिसकर्मी समाज के लिए प्रेरणा हैं। उनका समर्पण और साहस बताता है कि वर्दी सिर्फ शरीर से नहीं, बल्कि मजबूत इरादों से पहनी जाती है। ऐसे वीर जवानों को सम्मान मिलना पूरे पुलिस विभाग और समाज के लिए गर्व की बात है।
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