राष्ट्रीय पुस्तक मेले में डॉ. के. विक्रम राव को याद किया गया, “पत्रकार से साहित्यकार” तक की प्रेरक यात्रा पर हुई परिचर्चा
लखनऊ (आरएनआई) 22वें राष्ट्रीय पुस्तक मेले में हिंदी दिवस के अवसर पर रविवार को आयोजित विशेष परिचर्चा में दिवंगत वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार और विचारक डॉ. के. विक्रम राव की स्मृतियों को भावपूर्ण ढंग से याद किया गया। विषय था – “पत्रकार से साहित्यकार तक की यात्रा”।
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. राव की पत्नी और पूर्व मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. के. सुधा राव के संस्मरणों से हुई, जिन्होंने उनके साथ बिताए सात दशकों की स्मृतियों को साझा किया।
वरिष्ठ अभिनेता एवं रंगकर्मी अनिल रस्तोगी ने उन्हें याद करते हुए कहा, “फ़िल्म और रंगमंच पर उनकी गहरी पकड़ चकित करने वाली थी। बुंदेलखंड और गुजरात के अकाल पर उनके आलेख ऐतिहासिक दस्तावेज़ हैं।”
उत्तर प्रदेश के सूचना आयुक्त पी.एन. दिवेदी ने उन्हें पितृ-स्वरूप बताते हुए कहा, “हर पत्रकार कहीं न कहीं साहित्यकार भी होता है, और विक्रम राव ने हिंदी को बहुआयामी स्वरूप दिया।” वहीं सूचना आयुक्त दिलीप अग्निहोत्री ने कहा कि “विक्रम राव स्वयं में पत्रकारिता के संस्थान थे। उनकी वाक्य-रचना और शब्दों पर पकड़ अद्वितीय थी।”
वरिष्ठ संपादक सुधीर मिश्रा ने याद किया कि राव साहब अच्छे लेखकों को स्वयं फ़ोन कर बधाई देते और रचनात्मक सुझाव भी साझा करते थे।
वरिष्ठ पत्रकार राजकुमार सिंह ने डॉ. लोहिया पर उनके शोध को “अप्रतिम” बताया।
वरिष्ठ पत्रकार नवल कांत सिन्हा ने कहा कि “उन्होंने आईपीएस की नौकरी छोड़कर साबित किया कि पत्रकार सबसे बड़ा होता है। सूखी खबर को रोचक बनाना उनकी विशेषता थी।”
पत्रकार राजीव श्रीवास्तव ने उनके 62 वर्षों के पत्रकारीय अनुभव को “पत्रकारिता की साधना” कहा और बताया कि वे अंतिम समय तक लिखते रहे।
वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक शिवशरण सिंह ने कहा कि नई पीढ़ी को व्याकरण और वर्तनी के प्रति सजग करने का उनका प्रयास अविस्मरणीय है।
कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार शिल्पी सेन ने किया और समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
मंत्रोच्चार से कार्यक्रम की शुरुआत राम महेश मिश्रा और उनके साथियों ने की।
इस अवसर पर हिंदी संस्थान की संपादक अमिता दुबे, राष्ट्रीय पुस्तक मेले के संयोजक मनोज सिंह चंदेल, उषापति त्रिपाठी सहित अनेक पत्रकार और साहित्यकारों—रजत मिश्रा, नितिन श्रीवास्तव, आदेश शुक्ला, देवराज सिंह, श्रीधर अग्निहोत्री, अशोक मिश्रा, हिमांशु दीक्षित, अंकित श्रीवास्तव, जेपी शुक्ला, दीनदयाल मिश्रा और अतुल शुक्ला—ने सक्रिय सहयोग दिया।
यह आयोजन न केवल डॉ. विक्रम राव की पत्रकारिता और साहित्य साधना को श्रद्धांजलि बना, बल्कि नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत भी साबित हुआ।
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