भारत ने हाइपरसोनिक तकनीक में भरी बड़ी उड़ान, स्क्रैमजेट इंजन का सफल परीक्षण
भारत ने हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए दुनिया के चुनिंदा देशों में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा दी है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ ने ‘एक्टिवली कूल्ड फुल स्केल स्क्रैमजेट कम्बस्टर’ का सफल और लंबी अवधि वाला परीक्षण पूरा किया है। इस सफलता को भारत के हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण तकनीकी मील का पत्थर माना जा रहा है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह परीक्षण हैदराबाद स्थित रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला में किया गया। परीक्षण के दौरान स्क्रैमजेट इंजन करीब 1,200 सेकंड यानी लगभग 20 मिनट तक लगातार संचालित हुआ। इससे यह साबित हुआ कि इंजन अत्यधिक तापमान और दबाव की स्थिति में भी लंबे समय तक प्रभावी ढंग से काम कर सकता है, जो हाइपरसोनिक मिसाइलों के लिए बेहद जरूरी माना जाता है।
हाइपरसोनिक मिसाइलें ध्वनि की गति से पांच गुना या उससे अधिक रफ्तार से उड़ान भर सकती हैं। इतनी तेज गति के कारण मिसाइल का तापमान अत्यधिक बढ़ जाता है। ऐसे में ‘एक्टिव कूलिंग’ तकनीक मिसाइल को सुरक्षित बनाए रखने और लंबी दूरी तक संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
डीआरडीओ के मुताबिक इससे पहले जनवरी 2026 में इसी तकनीक का 700 सेकंड तक सफल परीक्षण किया गया था, लेकिन इस बार 1,200 सेकंड तक इंजन को सफलतापूर्वक चलाना बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यह परीक्षण हैदराबाद की अत्याधुनिक स्क्रैमजेट कनेक्ट पाइप परीक्षण सुविधा में किया गया।
यह स्वदेशी तकनीक सुपरसोनिक एयर-ब्रीदिंग प्रणाली पर आधारित है, जो मिसाइल को हाइपरसोनिक गति देने में सक्षम बनाती है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार इस सफलता के साथ भारत अब उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जिनके पास उन्नत हाइपरसोनिक तकनीक विकसित करने की क्षमता मौजूद है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह तकनीक भविष्य में भारत की सामरिक शक्ति को और मजबूत करेगी तथा रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी।
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