बागेश्वर धाम के सेवादार पर सरकारी बिल्डिंग हड़पने का आरोप, कलेक्टर ने रजिस्ट्री रोक जांच बिठाई

Oct 10, 2025 - 16:44
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बागेश्वर धाम के सेवादार पर सरकारी बिल्डिंग हड़पने का आरोप, कलेक्टर ने रजिस्ट्री रोक जांच बिठाई

छतरपुर (मध्य प्रदेश) (आरएनआई) जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें बागेश्वर धाम से जुड़े मुख्य सेवादार पर पीडब्ल्यूडी की करोड़ों रुपये की सरकारी इमारत को फर्जी दस्तावेज़ों के ज़रिए अपने नाम कराने का आरोप लगा है। खुलासा होते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया है और कलेक्टर ने रजिस्ट्री व नामांतरण पर तत्काल रोक लगाते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं।

फर्जी दस्तावेज़ों से हुई रजिस्ट्री
जानकारी के अनुसार बागेश्वर धाम के मुख्य सेवादार और धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के करीबी बताए जा रहे धीरेंद्र गौर ने गोटेगांव निवासी दुर्गेश पटेल के साथ मिलकर ये खेल रचा। सरकारी रिकॉर्ड में जो इमारत पीडब्ल्यूडी विभाग के नाम दर्ज है, उसे मात्र 81 लाख रुपये में अपने नाम करा लिया गया।

बताया जाता है कि यह भवन छतरपुर शहर में कोतवाली के पास बालाजी मंदिर के सामने स्थित है। कई सालों से यहां रह रहे उपाध्याय परिवार ने किरायेदार के तौर पर कूटरचित दस्तावेज तैयार कराए और कथित रूप से रजिस्ट्री करवाई। इस संपत्ति की मार्केट वैल्यू करीब 9 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

सरकारी रिकॉर्ड में अब भी पीडब्ल्यूडी के नाम
जांच के दौरान पता चला कि यह बिल्डिंग महाराजा छतरपुर ने सरकार को सौंपी थी और आज भी नजूल, नगरपालिका तथा पीडब्ल्यूडी रिकॉर्ड में दर्ज है। पीडब्ल्यूडी की भवन पुस्तिका के पन्ना नंबर 64 पर इसे “हाउस ऑफ उमाशंकर तिवारी दफ्तरी वाला” के नाम से उल्लेखित किया गया है। उमाशंकर तिवारी पूर्व कानूनगो थे और उनके परिवार को किराए पर रहने की अनुमति विभाग ने दी थी।

प्रशासन ने रजिस्ट्री पर लगाई रोक
जैसे ही यह मामला सुर्खियों में आया, कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने रजिस्ट्री और नामांतरण प्रक्रिया पर रोक लगा दी और जांच टीम गठित कर दी। पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर ने मामले को कोर्ट में ले जाने की बात कही है। इमारत पर नोटिस भी चस्पा करा दिया गया है।

9 करोड़ में बेचने की तैयारी से खुला राज
सूत्रों के अनुसार जब इस इमारत को करीब 9 करोड़ रुपये में बेचने की चर्चा शुरू हुई, तभी मामले की भनक प्रशासन को लगी। जांच हुई तो पता चला कि रजिस्ट्री पहले ही फर्जी तरीके से की जा चुकी है। अब पूरा मामला धोखाधड़ी, सरकारी संपत्ति की हेराफेरी और सरकारी रजिस्ट्री में गड़बड़ी की श्रेणी में सामने आया है।

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