'छात्रों की आवाज को आतंकियों की गूंज कहना गलत', धर्मेंद्र प्रधान के बयान पर खरगे का हमला
नई दिल्ली (आरएनआई)। केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan की कथित टिप्पणी को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाते हुए कहा कि शिक्षा और रोजगार से जुड़े गंभीर सवालों का जवाब देने के बजाय आंदोलनरत छात्रों को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
खरगे ने बुधवार को शिक्षा मंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि देशभर में छात्र परीक्षा प्रणाली, पेपर लीक और रोजगार जैसे मुद्दों को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त कर रहे हैं। ऐसे समय में छात्रों की आवाज को "आतंकियों की गूंज" बताना दुर्भाग्यपूर्ण और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों के सवालों का जवाब देना चाहिए, न कि उनकी आवाज को दबाने का प्रयास करना चाहिए।
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में कई प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि नीट समेत विभिन्न परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताओं ने छात्रों और अभिभावकों की चिंताएं बढ़ाई हैं। इन मुद्दों पर जवाबदेही तय करने के बजाय छात्रों के आंदोलनों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है।
सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी अपने बयान में खरगे ने कहा कि जो भी सरकार से सवाल करता है, उसे देश विरोधी बताने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। उन्होंने दावा किया कि पहले किसानों को लेकर भी इसी तरह की टिप्पणियां की गई थीं और अब छात्रों की आवाज को भी निशाना बनाया जा रहा है। कांग्रेस ने शिक्षा मंत्री से अपने बयान पर स्पष्टीकरण देने और नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की है।
वहीं, छात्र संगठन सीजेपी के संस्थापक Abhijeet Dipke ने भी शिक्षा मंत्री की कथित टिप्पणी की आलोचना करते हुए कहा कि न्याय की मांग कर रहे छात्रों को किसी भी तरह से आतंकवाद से जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि देश के युवा अपने अधिकारों और बेहतर शिक्षा व्यवस्था के लिए आवाज उठा रहे हैं और उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।
गौरतलब है कि नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेरता रहा है। विपक्ष का आरोप है कि बार-बार पेपर लीक की घटनाओं से परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता प्रभावित हुई है, जबकि सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं।
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