जयपुर में फिर बड़ा बुलडोजर एक्शन की तैयारी, नंदपुरी-जगतपुरा कॉरिडोर के लिए JDA ने शुरू किया सर्वे
जयपुर। (आरएनआई) राजस्थान की राजधानी जयपुर में अतिक्रमण हटाने की दिशा में एक और बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) ने नंदपुरी-जगतपुरा कॉरिडोर को विकसित करने के लिए सर्वे कार्य प्रारंभ कर दिया है। यह कार्रवाई उस क्षेत्र में प्रस्तावित है जहां हाल ही में नूरानी मस्जिद को लेकर विवाद सामने आया था। अधिकारियों के अनुसार सर्वे पूरा होने के बाद अतिक्रमणकर्ताओं को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
जानकारी के मुताबिक राजस्व रिकॉर्ड में 80 फीट चौड़ी दर्ज इस सड़क पर वर्तमान में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण है, जिसके कारण सड़क लगभग पूरी तरह से गायब हो चुकी है। करीब डेढ़ किलोमीटर लंबा यह मार्ग नंदपुरी अंडरपास को जगतपुरा से जोड़ता है और आसपास की कई कॉलोनियों के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग माना जाता है।
JDA अधिकारियों का कहना है कि सड़क के दूसरी ओर रेलवे लाइन पार भी 80 फीट चौड़ी सड़क प्रस्तावित है, लेकिन वहां भी व्यापक अतिक्रमण हो चुका है। ऐसे में आने वाले समय में यहां बड़े स्तर पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई देखने को मिल सकती है। हालांकि प्रशासनिक प्रक्रिया, नोटिस तामील और संभावित कानूनी चुनौतियों के कारण इस अभियान को शुरू होने में लगभग चार महीने का समय लग सकता है।
प्रशासन का दावा है कि सड़क चौड़ीकरण और कॉरिडोर निर्माण से न केवल नंदपुरी, जगतपुरा और मालवीय नगर जैसे क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी, बल्कि राजधानी की सबसे व्यस्त सड़कों में शामिल टोंक रोड पर यातायात का दबाव भी कम किया जा सकेगा।
दरअसल, JDA ने टोंक रोड के ट्रैफिक को वैकल्पिक मार्गों की ओर डायवर्ट करने के लिए एक व्यापक योजना तैयार की है। इसके तहत टोंक की ओर जाने वाले वाहनों को महल रोड और सीतापुरा मार्ग से जोड़ने की रणनीति बनाई गई है, जिससे टोंक रोड पर वाहनों की संख्या कम हो सके।
योजना के तहत केवल नंदपुरी-जगतपुरा मार्ग ही नहीं, बल्कि टोंक रोड से जगतपुरा और सीतापुरा को जोड़ने वाली कई अन्य सड़कों पर भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि अधिकांश मार्गों पर अतिक्रमण सीमित है, फिर भी सड़क चौड़ीकरण और यातायात सुधार के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
अब सर्वे के बाद नोटिस जारी होने और आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के साथ यह स्पष्ट होगा कि राजधानी में प्रस्तावित यह एंटी-एन्क्रोचमेंट अभियान कितना व्यापक रूप लेता है और शहर की यातायात व्यवस्था को कितना लाभ पहुंचाता है।
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