जर्जर छत के साए में पढ़ाई: स्कूल के अंदर नहीं, मैदान में कक्षा लगाने को मजबूर बच्चे

Jun 24, 2026 - 11:59
Jun 24, 2026 - 12:03
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जर्जर छत के साए में पढ़ाई: स्कूल के अंदर नहीं, मैदान में कक्षा लगाने को मजबूर बच्चे

इस स्कूल के बच्चे और स्टाफ डरे हुए हैं। स्कूल की बिल्डिंग अंदर बाहर से रंगी पुती है। बच्चों को बैठने के लिए स्कूल में बेंच डेस्क भी हैं। लेकिन फिर भी बच्चे और स्टाफ डर की वजह से स्कूल के अंदर बैठने के बजाए बाहर मैदान में कक्षा लगाने में खुद को सुरक्षित मानते हैं। इन्हें डर है कि स्कूल में कभी भी इनके साथ कोई हादसा हो सकता है।

ये स्कूल गुना जिले के बमौरी विकासखंड में ग्राम डुमावन में स्थित है। स्कूल सरकारी है। इस प्राथमिक स्कूल में कक्षा एक से पांचवीं तक के बच्चों को पढ़ाया जाता है। छोटी कक्षाओं के बच्चे भी छोटे ही हैं। इन बच्चों और यह के स्टाफ के डर की वजह स्कूल की छत है। छत वैसी ही है जैसी अक्सर सरकारी छतें होती हैं। लेकिन इस छत की मियाद शायद खत्म हो चुकी है।

स्कूल की छत का सरिया खस्ताहाल हो चुका है। जिससे छत जर्जर हो चुकी है। छत के निचले हिस्से से कंक्रीट मटेरियल अचानक क्लास रूम में गिर पड़ता है। विगत दिवस भी छत का एक हिस्सा झड़ गया और ठीक उस जगह गिरा जहां बच्चों के बैठने की बैंच और डेस्क लगी हैं। गनीमत यह रही कि उस समय कक्षा में कोई नहीं था, वर्ना देश में असुरक्षित भवनों में हो रही दुर्घटनाओं की खबर के बीच ये खबर भी सुर्खियां बन जाती।

ग्राम डुमावन के लोगों ने बताया कि स्कूल बाहर से जितना अच्छा दिखाई देता है इसकी छत उतनी ही जर्जर है। वर्षा होने पर कई छत से पानी टपकता है। छत के कुछ हिस्सों का प्लास्टर एवं सामग्री कई बार टूटकर नीचे गिर चुके हैं। भवन असुरक्षित है। किसी भी समय छत का कोई हिस्सा या पूरी छत गिरने जैसी गंभीर दुर्घटना हो सकती है, जिससे विद्यालय में अध्ययनरत छोटे-छोटे बच्चों एवं शिक्षकों के जीवन को गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। 

ग्रामीणों के मुताबिक शिक्षा विभाग के सीएसी, बीएसी, बीआरसी और अन्य अधिकारी जब भी गांव आए उनको भी स्कूल की स्थिति बताकर, छत को ठीक कराने के लिए कई बार शिकायत की है। लेकिन सबने अनसुनी ही की।

अब बारिश फिर सिर पर है। हादसे से आशंकित ग्रामीण चाहते हैं कि स्कूल बिल्डिंग का तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराया जाए। स्कूल बिल्डिंग असुरक्षित पाई जाए तो बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए वैकल्पिक उपाय किए जाएं और तत्काल छत की आवश्यक मरम्मत अथवा जर्जर छत तोड़कर नई छत डलवाई जाए, ताकि स्कूल की छत के नीचे बच्चे और स्टाफ सुरक्षित रह सकें।

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