बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन पर ब्रिटेन में उठी आवाज, यूनिसॉन सम्मेलन में पाकिस्तान की आलोचना
ब्रिटेन में आयोजित सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े ट्रेड यूनियन सम्मेलन में बलूचिस्तान में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। सम्मेलन में शामिल प्रतिनिधियों ने पाकिस्तान में बलोच कार्यकर्ताओं के जबरन गायब किए जाने, न्यायिक प्रक्रिया के बिना हत्याओं, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
16 जून से शुरू हुए वार्षिक प्रतिनिधिमंडल सम्मेलन में बलोच समुदाय से जुड़े कार्यकर्ताओं ने बलूचिस्तान की स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया। बलोच कार्यकर्ता ओमर करीम ने सम्मेलन में कहा कि क्षेत्र में मानवाधिकारों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है और इस मुद्दे पर वैश्विक स्तर पर जवाबदेही तय किए जाने की आवश्यकता है।
सम्मेलन में ब्रिटेन के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे करीब एक हजार प्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में पर्यवेक्षकों ने बलूचिस्तान सहित खैबर पख्तूनख्वा और सिंध क्षेत्रों में कथित मानवाधिकार हनन की घटनाओं पर चर्चा की। वक्ताओं ने महिलाओं, बच्चों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ उत्पीड़न के आरोपों को भी उठाया।
कार्यक्रम के दौरान बलोच समुदाय के प्रतिनिधियों ने अंतरराष्ट्रीय ट्रेड यूनियनों, मानवाधिकार संगठनों और राजनीतिक संस्थाओं से इस मुद्दे पर आवाज उठाने और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए समर्थन देने की अपील की। सम्मेलन में यह भी कहा गया कि मानवाधिकारों की रक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए वैश्विक समुदाय को ऐसे मामलों पर सतत निगरानी रखनी चाहिए।
ब्रिटेन में चलाए जा रहे इस अभियान का उद्देश्य बलूचिस्तान से जुड़ी शिकायतों और आरोपों को अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाना तथा मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग को मजबूत करना है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0



