गणेशजी का स्त्री रूप ‘विनायकी’ पुराणों में हुआ उजागर
नई दिल्ली (आरएनआई) पौराणिक कथाओं में कई ऐसे घटनाक्रम वर्णित हैं, जिनमें प्रमुख देवताओं को किसी न किसी परिस्थिति में स्त्री रूप धारण करना पड़ा। इनमें भगवान विष्णु, भगवान ब्रह्मा, हनुमान, इंद्र और अर्जुन का नाम प्रमुख है। लेकिन सबसे रोचक तथ्य यह है कि सर्वप्रथम पूजनीय भगवान गणेश को भी अपने स्त्री रूप में प्रकट होना पड़ा था, जिसे ‘विनायकी’ के नाम से जाना जाता है।
धर्मोत्तर पुराण और वन दुर्गा उपनिषद में विनायकी या गणेश्वरी के रूप का उल्लेख मिलता है। कथा अनुसार, दैत्य अंधक ने माता पार्वती को अपनी अर्धांगिनी बनाने का प्रयास किया। माता पार्वती ने भगवान शिव से सहायता मांगी, परंतु अंधक के रक्त से लगातार राक्षसी अंधका का निर्माण हो रहा था।
इस संकट से निपटने के लिए माता पार्वती ने सभी स्त्री शक्तियों को बुलाया। फिर भी अंधक के गिरते रक्त का विनाश संभव नहीं हो पाया। ऐसे में भगवान गणेश स्वयं अपने स्त्री रूप ‘विनायकी’ में प्रकट हुए और अंधक के रक्त को पीकर उसे नष्ट किया।
16वीं सदी से गणेशजी के इस स्त्री स्वरूप की मान्यता प्रचलित हुई। विनायकी का रूप माता पार्वती के समान था, लेकिन उनका सिर गज का था, जैसा गणेशजी का परंपरागत रूप होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह कथा न केवल गणेशजी की अद्भुत शक्तियों को दर्शाती है, बल्कि यह भी सिखाती है कि प्रत्येक दैवीय शक्ति में पुरुष और स्त्री तत्व दोनों विद्यमान हैं, जो परिस्थितियों के अनुसार सक्रिय होते हैं।
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