'आपको राष्ट्रपति संदर्भ पर हमारी सलाह का इंतजार करना होगा', तमिलनाडु सरकार से बोला शीर्ष कोर्ट
नई दिल्ली (आरएनआई)। सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया है कि वह राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति को भेजे गए विधेयक पर फिलहाल कोई कदम न उठाए और ‘राष्ट्रपति संदर्भ’ पर सलाह का इंतजार करे। यह निर्देश तमिलनाडु शारीरिक शिक्षा एवं खेल विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2025 से जुड़ी याचिका में आया है।
मामले का तर्क
तमिलनाडु सरकार ने आरोप लगाया है कि राज्यपाल आर. एन. रवि ने मंत्रिपरिषद की सलाह के बिना विधेयक को राष्ट्रपति के पास भेजा, जो असांविधानिक है। सरकार का कहना है कि यह संविधान के अनुच्छेद 163(1) और 200 का उल्लंघन है।
सुप्रीम कोर्ट का रुख
चीफ जस्टिस बी.आर. गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा कि अदालत इस मामले में तब सुनवाई करेगी जब राष्ट्रपति संदर्भ का नतीजा सामने आए। बेंच ने अनुमान लगाया कि लगभग चार हफ्ते में निर्णय आ सकता है और यह 21 नवंबर से पहले घोषित हो जाएगा।
वकीलों की दलीलें
वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि राज्यपाल किसी विधेयक को राष्ट्रपति के पास नहीं भेज सकते जब मंत्रिपरिषद की सलाह मिल चुकी हो।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि 2015 से 2025 तक राज्यपालों की ओर से 381 संदर्भ राष्ट्रपति को भेजे जा चुके हैं।
राज्य की ओर से मुकुल रोहतगी ने कहा कि असल सवाल यह है कि क्या राज्यपाल हर विधेयक की हर धारा पर न्यायिक नजर रख सकते हैं।
विधेयक का इतिहास
यह विधेयक 6 मई 2025 को मुख्यमंत्री की अनुशंसा के साथ राज्यपाल को भेजा गया था, लेकिन 14 जुलाई को इसे राष्ट्रपति के पास भेज दिया गया। राज्य सरकार ने इसे अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया।
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