हिन्दी दिवस पर शिक्षिका सुमन पाण्डेय का संदेश – कथनी-करनी में एकरूपता से ही होगा हिन्दी का वास्तविक सम्मान

Sep 14, 2025 - 17:32
Sep 14, 2025 - 17:33
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हिन्दी दिवस पर शिक्षिका सुमन पाण्डेय का संदेश – कथनी-करनी में एकरूपता से ही होगा हिन्दी का वास्तविक सम्मान

शाहजहांपुर (आरएनआई) यह तथ्य सर्वविदित है कि जिस राष्ट्र की अपनी कोई भाषा नहीं होती है वह गूंगा और बहरा होता है । उसकी संस्कृति अस्तित्व में नहीं रह सकती है। यह गर्व की बात है कि हम भारतीयों की अपनी एक भाषा है, यही कारण है कि हजारों वर्षों से हमारी संस्कृति एवं सभ्यता का अस्तित्व और स्थान रहा है, किंतु यूरोपीय आक्रांताओं ने हमसे हमारी भाषा छीनने के प्रयत्न किए, हमारी भाषायी सम्पदा को नुकसान पहुंचाया,परिणाम स्वरुप हम अपने स्वर्णिम अतीत को भूलने लगे। आज हिन्दी दिवस इसी की याद दिला रहा है कि हम कुछ भूल रहे हैं।हमारा हमारी भाषा के प्रति कुछ कर्तव्य है। आज संविधान की दृष्टि से हिन्दी को सम्मान प्राप्त है किंतु हमारी सोच हिन्दी का अपमान कर रही है। मैं किसी भी भाषा की विरोधी नहीं हूं, किंतु हिन्दी के सम्मान और संरक्षण की बात कहना चाहती हूं। जहां तक विज्ञान और तकनीकी विषयों की बात है तो जापान, रूस या चीन में यह सभी विषय उनकी अपनी भाषा में है और वह विकसित देश हैं। हम अपनी भाषा ही गुलामी की मानसिकता से पीड़ित होने के कारण उधार की भाषा में अपना सामाजिक स्तर बनाने की कोशिश करते हैं।जब तक यह मानसिकता बरकरार रहेगी हिन्दी दिवस मात्र मंचों और भाषणों तक सीमित रहेगा। हमें अपनी कथनी और करनी में एकरूपता लाना है तभी हिन्दी का वास्तविक सम्मान संरक्षण और विकास हो सकेगा।

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Laxmi Kant Pathak Senior Journalist | State Secretary, U.P. Working Journalists Union (Regd.)