सीजेआई सूर्यकांत बोले- मध्यस्थता परिषद का गठन अब तक नहीं, संसद से नए विधेयक की उम्मीद
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने कहा कि 2019 में कानून बनने के बावजूद भारतीय मध्यस्थता परिषद का अब तक गठन नहीं हो सका है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मध्यस्थता एवं सुलह से संबंधित नया संशोधन विधेयक जल्द संसद में पेश किया जाएगा।
दिल्ली में भारतीय मध्यस्थता एवं सुलह संस्थान के रजत जयंती समारोह को संबोधित करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अक्तूबर 2024 में विश्वनाथन समिति की सिफारिशों के आधार पर तैयार मध्यस्थता एवं सुलह (संशोधन) विधेयक का मसौदा सार्वजनिक सुझावों के लिए जारी किया गया था। अब उम्मीद है कि इसका संशोधित स्वरूप संसद में पेश होगा। उन्होंने कहा कि यदि भारत को अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता का प्रमुख केंद्र बनना है, तो घोषणा और क्रियान्वयन के बीच की दूरी समाप्त करनी होगी।
सीजेआई ने कहा कि केवल फैसलों से नहीं, बल्कि भरोसे से न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता बनती है। उन्होंने अदालतों में लंबित मामलों पर चिंता जताते हुए बताया कि देशभर की अदालतों में इस समय पांच करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं, जिनमें लगभग 20 प्रतिशत भूमि और संपत्ति विवाद से जुड़े हैं।
उन्होंने कहा कि मध्यस्थता, सुलह और डिजिटल विवाद समाधान जैसी व्यवस्थाओं का उद्देश्य लोगों को अदालत के बाहर भी निष्पक्ष, प्रभावी और समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराना है, जिससे न्याय व्यवस्था पर बोझ कम हो सके।
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