जब जागा खाकी का स्वाभिमान: रन्नौद में वर्दी पर हमले के बाद पुलिस की सख्त कार्रवाई

Feb 3, 2026 - 17:15
Feb 3, 2026 - 17:24
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जब जागा खाकी का स्वाभिमान: रन्नौद में वर्दी पर हमले के बाद पुलिस की सख्त कार्रवाई

शिवपुरी (आरएनआई) शिवपुरी जिले के रन्नौद थाना क्षेत्र में घटी एक घटना ने न सिर्फ पुलिस व्यवस्था, बल्कि कानून के सम्मान को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए। थाना परिसर के सामने एक आरक्षक पर हुए हमले को केवल एक व्यक्ति पर हिंसा के रूप में नहीं, बल्कि कानून की इकबालियत पर सीधा हमला माना जा रहा है। फर्क इतना रहा कि इस बार खाकी झुकी नहीं, बल्कि तनकर खड़ी हुई और यह स्पष्ट संदेश दिया कि वर्दी की इज्जत किसी राजनीतिक रसूख की जागीर नहीं है।

मामले की शुरुआत एक साधारण यातायात उल्लंघन से हुई। बिना सीट बेल्ट वाहन चलाने पर कार्रवाई से नाराज लोगों ने आरक्षक अवधेश शर्मा पर फर्सी से हमला कर दिया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। हैरानी की बात यह रही कि आरक्षक को लहूलुहान करने के बाद आरोपी खुद को पीड़ित बताने की कोशिश में थाने के सामने धरने पर बैठ गए, वह भी सत्ताधारी नेताओं की अगुआई में। इसे कानून से बचने के लिए विक्टिम कार्ड खेलने की राजनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

घटना के बाद स्थानीय राजनीति की भूमिका भी सवालों के घेरे में आई। जब घायल आरक्षक अस्पताल में उपचार के लिए संघर्ष कर रहा था, उस समय जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा थी कि वे कानून के साथ खड़े होते। इसके उलट, थाने पर पहुंचकर पुलिस पर दबाव बनाने और थाना प्रभारी को निलंबित करने की मांग ने लोकतांत्रिक मर्यादाओं को झकझोर दिया।

हालांकि इस बार पुलिस ने परंपरागत दबावों के आगे झुकने के बजाय सख्त रुख अपनाया। रन्नौद पुलिस ने राजनीतिक हस्तक्षेप को दरकिनार करते हुए भारतीय न्याय संहिता की कठोर धाराओं में मामला दर्ज किया और साफ कर दिया कि धरना, दबाव और रसूख अब एफआईआर दर्ज होने से नहीं रोक सकते। यह कार्रवाई शिवपुरी जिले की कानून व्यवस्था के लिए एक मानक के रूप में देखी जा रही है।

इस घटनाक्रम ने यह संदेश दिया है कि जब रक्षक सुरक्षित होंगे, तभी समाज सुरक्षित रहेगा। वर्दी का मनोबल तभी ऊंचा रहता है, जब विभाग अपने कर्मियों के साथ मजबूती से खड़ा हो। रन्नौद पुलिस की यह कार्रवाई आम जनता में कानून के प्रति भरोसा जगाती है और यह याद दिलाती है कि नेताओं का काम कानून बनवाना है, कानून हाथ में लेने वालों की पैरवी करना नहीं। इस सख्ती की गूंज दूर तक जानी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी वर्दी पर हाथ उठाने से पहले सौ बार सोचने को मजबूर हो।

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