उत्तर प्रदेश क्रिकेट में पारदर्शिता की बड़ी पहल: हाई कोर्ट के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए सरकार को मिला अंतिम अवसर!
लखनऊ/कानपुर (आरएनआई) उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (UPCA) में कथित अनियमितताओं और राज्य के नाम के अनाधिकृत उपयोग को लेकर अब कानूनी कार्रवाई तेज हो गई है। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ के आदेश का तत्काल और पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए खेल विभाग के प्रमुख सचिव को एक औपचारिक नोटिस भेजा गया है, जो राज्य में खेल प्रशासन में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
यह कार्रवाई याचिकाकर्ता उपेंद्र यादव द्वारा की गई है, जिन्होंने प्रमुख सचिव, खेल विभाग, उत्तर प्रदेश शासन को 31 अक्टूबर 2025 को पत्र भेजकर 07 नवंबर 2025 तक माननीय न्यायालय के आदेश का पालन करने का अनुरोध किया है। ऐसा न करने पर अवमानना याचिका दायर करने की चेतावनी दी गई है।
न्यायालय के आदेश का सम्मान और जवाबदेही
यह पूरा मामला याचिका संख्या WRIT-C No. 7825/2025 से जुड़ा है, जिसमें माननीय हाई कोर्ट ने 19 अगस्त 2025 को प्रमुख सचिव, खेल विभाग को स्पष्ट निर्देश दिया था कि वे याचिकाकर्ता की शिकायत पर सभी संबंधित पक्षों को सुनने के बाद आठ सप्ताह के भीतर उचित आदेश पारित करें।
इस नोटिस के जरिए, याचिकाकर्ता ने उत्तर प्रदेश सरकार को यह सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण अवसर दिया है कि राज्य में खेल संस्थाओं का संचालन नियमानुसार हो और वे न्यायालय के निर्देशों का सम्मान करें।
यूपीसीए पर लगे गंभीर आरोप
याचिकाकर्ता की शिकायत और नोटिस में UPCA के खिलाफ दो गंभीर मुद्दे उठाए गए हैं, जो प्रदेश में क्रिकेट के भविष्य के लिए स्वच्छ प्रशासन की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं:
आपराधिक मामले: कंपनी रजिस्ट्रार (ROC), कानपुर ने UPCA (जो कि कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 8 के तहत पंजीकृत है) के खिलाफ 13 आपराधिक शिकायतें दर्ज की हैं। माननीय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, कानपुर ने इन मामलों का संज्ञान लेते हुए आरोपियों को समन जारी किए हैं।
नाम का अवैध उपयोग: UPCA पर राज्य सरकार से अनिवार्य अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त किए बिना संस्था के नाम में "उत्तर प्रदेश" शब्द का अनाधिकृत और अवैध रूप से उपयोग करने का आरोप है।
पारदर्शिता के लिए मांग
याचिकाकर्ता ने प्रमुख सचिव से अपील की है कि वे माननीय उच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन करते हुए UPCA के नाम से "उत्तर प्रदेश" शब्द हटाने और कंपनी के पंजीकरण को रद्द करने की दिशा में तत्काल कार्रवाई करें।
इस कदम को उत्तर प्रदेश के क्रिकेट जगत में पारदर्शिता और जवाबदेही स्थापित करने के एक मजबूत प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। सरकार के पास अब एक स्पष्ट कानूनी बाध्यता है कि वह अदालत के आदेश का पालन करके राज्य में खेल संस्थाओं के संचालन में ईमानदारी और न्याय सुनिश्चित करे।
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