उत्तराखंड-हिमाचल सीमा पर बस हादसा: नोटों से भरे बैग को लेकर मचा विवाद, पहचान के बाद अब्दुल कयूम के परिजनों को सौंपा गया
रोनहाट (आरएनआई)। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा के पास मंगलवार को हुए एचआरटीसी बस हादसे ने जहां कई परिवारों को गहरे दुख में डुबो दिया, वहीं घटनास्थल पर इंसानियत को शर्मसार करने वाला दृश्य भी सामने आया। हादसे के बाद मौके पर एक बैग में भरी बड़ी रकम मिलने से अफरा-तफरी मच गई और कुछ लोग उस पैसे पर अपना दावा ठोकते हुए आपस में उलझ पड़े।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दुर्घटना में तीन लोगों की मौत हो चुकी थी और कई यात्री घायल अवस्था में सहायता का इंतजार कर रहे थे। इसी बीच घटनास्थल पर एक काले कपड़े का बैग मिला, जिसमें 3 लाख 20 हजार रुपये नकद थे। पैसों से भरा बैग देखते ही कुछ लोग उसे अपना या अपने घायल रिश्तेदार का बताते हुए झगड़ने लगे। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने तुरंत हस्तक्षेप किया और बैग को अपने कब्जे में ले लिया।
थाना प्रभारी कालसी दीपक धारीवाल ने बताया कि बैग की जांच के दौरान उसमें से एक पैन कार्ड और फोटो पहचान पत्र मिला, जिससे उसकी पहचान सहारनपुर निवासी अब्दुल कयूम के रूप में हुई। अब्दुल कयूम नेरवा में क्रॉकरी की दुकान चलाते हैं और उसी बस में सफर कर रहे थे। हादसे में घायल होने के बाद उन्हें विकासनगर के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
प्रशासन ने औपचारिक पहचान प्रक्रिया पूरी की। नायब तहसीलदार राजेंद्र लाल की मौजूदगी में उपमंडलाधिकारी चकराता के समक्ष बैग अब्दुल कयूम के परिजनों को सौंप दिया गया। उनकी बेटी सानिया ने बैग प्राप्त किया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बैग में मिली रकम और दस्तावेजों से स्वामित्व की पुष्टि हो गई थी।
इधर, हादसे के बाद राहत और बचाव कार्यों के साथ प्रशासनिक सक्रियता भी देखने को मिली। शिमला जिला प्रशासन की एक टीम विकासनगर अस्पताल पहुंची और घायलों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। टीम में एडीएम लॉ एंड ऑर्डर पंकज शर्मा और नायब तहसीलदार चंद वर्मा शामिल थे। उपायुक्त अनुपम कश्यप के निर्देश पर गठित कमेटी ने घायलों और मृतकों के परिजनों को फौरी राहत राशि वितरित की।
प्रशासन के अनुसार, सामान्य घायलों को पांच-पांच हजार रुपये, गंभीर रूप से घायल और रेफर मरीजों को दस-दस हजार रुपये तथा मृतकों के परिजनों को पच्चीस-पच्चीस हजार रुपये की सहायता प्रदान की गई। उपायुक्त शिमला ने उत्तराखंड प्रशासन और स्थानीय एजेंसियों का भी आभार जताया, जिन्होंने त्वरित कार्रवाई करते हुए राहत और बचाव कार्यों में सहयोग किया।
यह हादसा जहां सड़क सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है, वहीं घटनास्थल पर पैसे के लालच में हुए विवाद ने संवेदनहीनता की एक कड़वी तस्वीर भी सामने रख दी। बावजूद इसके, प्रशासनिक सतर्कता से सही मालिक तक रकम पहुंचाई जा सकी, जिससे एक सकारात्मक उदाहरण भी स्थापित हुआ।
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