“सच की जीत: राजीव शुक्ला के झूठ का पर्दाफाश”
नई दिल्ली (आरएनआई) भारत के लोकतंत्र ने एक बार फिर सच्चाई का साथ दिया है। वर्षों से चल रहे प्रीतिप सिंह (अलीगढ़) बनाम राजीव शुक्ला के मामले में अब निर्णायक मोड़ आ गया है। लोकपाल ऑफ इंडिया ने इस गंभीर शिकायत की जांच पूरी कर ली है और 12 नवंबर 2025 को अंतिम सुनवाई के लिए राज्यसभा सांसद राजीव शुक्ला को तलब किया है।
यह मामला तब शुरू हुआ जब प्रीतिप सिंह ने आरोप लगाया कि राजीव शुक्ला ने अपने नामांकन पत्रों और हलफनामों में गलत जन्मतिथि दर्ज कराकर निर्वाचन प्रक्रिया को गुमराह किया। जांच के दौरान यह पाया गया कि उन्होंने अलग-अलग अवसरों पर अपने चार हलफनामों में अलग-अलग जन्मतिथियाँ — कभी 13 सितंबर 1959, तो कभी 20 जुलाई 1957 — दर्शाईं। यह न केवल फर्जी हलफनामा देने का मामला है, बल्कि कानूनी दृष्टि से भी गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
लोकपाल की इस कार्रवाई के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि अब राजीव शुक्ला की राज्यसभा सदस्यता पर संकट मंडरा रहा है, और फर्जी दस्तावेज़ देने के मामले में उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी संभावित है।
यह फैसला उन नागरिकों की जीत है जो सत्य और पारदर्शिता के लिए वर्षों तक संघर्षरत रहे। प्रीतिप सिंह का यह साहसिक कदम लोकतंत्र में सच्चाई की जीत और झूठ पर न्याय की ऐतिहासिक विजय का प्रतीक बन गया है।
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