मुजफ्फरपुर में प्रिंसिपल की दबंगई : बोला - डीएम साहब भी बिना मेरे परमिशन के नही घुस सकते है!

Aug 30, 2025 - 14:36
Aug 30, 2025 - 14:45
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मुजफ्फरपुर में प्रिंसिपल की दबंगई : बोला - डीएम साहब भी बिना मेरे परमिशन के नही घुस सकते है!

मुजफ्फरपुर (आरएनआई) बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. वायरल वीडियो ने कई तरह के सवाल खरे कर दिया है.

वायरल वीडियो के अनुसार वीडियो साहेबगंज प्रखंड के मध्य विद्यालय भलूई खान का है, जहा प्रधानाध्यापक सूरज कुमार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में वह कहते दिख रहे हैं कि “मेरे स्कूल में अगर डीएम भी आएं तो उन्हें मेरी परमिशन लेनी होगी.”

वीडियो में बच्चों के सामने दिखी ‘धौंस’..
बताया जा रहा है कि यह वीडियो दो दिन पुराना है और उस वक्त स्कूल के बच्चे भी मौके पर मौजूद थे। प्रधानाध्यापक के इस बयान को शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला और अधिकारियों के खिलाफ धौंस जमाने वाला बताया जा रहा है.
समिति की जांच के दौरान बढ़ा विवाद

बताते चले की राज्य सरकार ने स्कूलों की पारदर्शिता और निगरानी के लिए प्रखंड स्तर पर 20 सूत्री समिति का गठन किया, जिसका काम सरकार की चल रही योजनाओं की देखरेख करना है. इसी कड़ी में समिति के अध्यक्ष मनी रोशन सिंह जब स्कूल निरीक्षण के लिए पहुंचे तो प्रधानाध्यापक सूरज कुमार से उनकी तीखी बहस हो गई। मामला इतना बढ़ा कि आरोप-प्रत्यारोप तक पहुँच गया. हालाकि वायरल वीडियो पुष्टि हमारा चैनल नही करता है, लेकिन इससे कई सवाल खड़े हो गए हैं.

क्या बच्चो के हक पर राजनीतिक और अहंकार का ताला लगा!?..
वायरल वीडियो में स्कूल की जो शिकायते है वो कम चौंकाने वाली नहीं हैं. दरअसल विद्यालय में अंडे की ट्रे रखी रहती है, मगर बच्चों की थाली तक वह अंडा पहुँचता नहीं। मेनू में रोज़ाना अलग-अलग भोजन देने का नियम है, लेकिन बच्चों को परोसा जाता है वही एकरस थाली जैसे शिक्षा व्यवस्था की तरह, जहाँ विविधता का वादा कर ठूँसा जाता है बस नीरसता। रसोइयों ने भी अपनी बेबसी जताई है। जिस स्कूल को बच्चों की भूख मिटानी थी, वहाँ भूख पर भी राजनीति और भ्रष्टाचार का ताला जड़ दिया गया है. प्रधानाध्यापक का अहंकार और समिति का आक्रोश मिलकर यह संकेत देता है कि शिक्षा मंदिर अब ‘दबंगई का दरबार’ बन चुका है.

भ्रष्टाचार बनाम सत्ता का मद..

वायरल वीडियो में एक ओर समिति अध्यक्ष भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने लाते दिखे, तो दूसरी ओर प्रधानाध्यापक अपने ‘नियम-कानून’ और ताकत का खुलेआम ऐलान करते नजर आए, अब यह वीडियो न केवल शिक्षा व्यवस्था की लापरवाही उजागर कर रहा है बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीरता पर भी सवाल खड़े कर रहा है.

क्या यह वीडियो सिर्फ एक स्कूल की कहानी है या पूरे तंत्र को आइना दिखाने का काम कर रही है. जहाँ मासूम बच्चों की थाली से अंडा गायब रहा है लेकिन दबंगई और भ्रष्टाचार की प्लेट हमेशा भरी हुई और सवाल यही है कि जब शिक्षा का चौकीदार ही भ्रष्टाचार और अहंकार में डूब जायेगा तो आने वाली पीढ़ियों में ज्ञान का दीप कैसे जलेगा.

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