मथुरा डीआईओएस कार्यालय में 'खेला', जांच अधिकारी बदले, आरोपितों को पहुँचाया लाभ!

Jun 19, 2025 - 13:15
Jun 19, 2025 - 13:15
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मथुरा डीआईओएस कार्यालय में 'खेला', जांच अधिकारी बदले, आरोपितों को पहुँचाया लाभ!

मथुरा (आरएनआई) जिला विद्यालय निरीक्षक मथुरा की कार्यशैली लगातार गुल खिला रही हैं सच को झूठ ओर झूठ को सच बनाने में सिद्धहस्त जिला विद्यालय निरीक्षक मथुरा है पहले जांच अधिकारी प्रिंसिपल राजकीय इंटर कॉलेज मथुरा एवं सह जिला विद्यालय निरीक्षक मथुरा को बनाया। जांच तेजगति से चल रही थी इसी बीच आरोपित पक्ष से मिलकर जिला विद्यालय निरीक्षक मथुरा ने अपने पसंदीदा ओर विवादित जांच करने में माहिर ओर आरोपित पक्ष को लाभ पहुंचाने में सिद्धहस्त को जांच अधिकारी नामित कर दिया नवीन जांच अधिकरी पूर्व में बनाए गए  जांच अधिकारी से निम्न स्तर की रैंक के है मामला जमुना प्रसाद श्री राम इण्टर कालेज सुरीर मथुरा की प्रबंध समिति पर प्रशासन योजना के नियमों की अनदेखी करते हुए सोसाइटी से भिन्न नितान्त फर्जी सदस्यों से कपोल कल्पित प्रपत्रों के आधार पर जबरन अवैध कब्जा कराए जाने में खेला किया जा रहा है।

शिकायतकर्ता दिनेश चंद गुप्ता के अनुसार 
ऑनलाईन शिकायत संदर्भ संख्या 40014524025036 दि 13.11.2024 की जांच किया जाना उल्लेखित है, जबकि पोर्टल पर उक्त शिकायत  निस्तारित किया जाना दिखाई दे रहा है। जिला विद्यालय निरीक्षक मथुरा ने अपने पत्र संख्या माo/1464- 65/2025- 26 दि 21.05.20 में पूर्व आदेश संख्या माo/281- 83/2025- 26 दि 15.04.2025 द्वारा नियुक्त   

सहजिलाविद्यालय निरीक्षक मथुरा एवं प्रधानाचार्य वीo डीo पीo राजकीय इण्टर कालेज मथुरा की संयुक्त जॉच समिति का उल्लेख करते हुए शिकायत संदर्भ संख्या 40014525008086 दिनांक 11.04.2025 पर जांच हेतु निर्देशित किया। जिला विद्यालय निरीक्षक मथुरा  ने संयुक्त शिक्षा निदेशक आगरा को पत्रांक माo/1758- 59/2025- 26  दि 30.05.2025 द्वारा इसी 11.04.2025 की लम्बित शिकायत की जॉच किए जाने का उल्लेख किया है। यही शिकायत संदर्भ संख्या पोर्टल  पर लंबित थी        

  

पूर्व नियुक्त जॉच समिति द्वारा दि 19.04.2025, 28.04.2025, ब 08.05.2025 को प्रकरण पर जांच हेतु साक्ष्य/अभिकथन प्रस्तुत करने के लिए तीन बार नोटिस भी भेजे थे। शिकायतकर्ता ने अपने अभिकथन/साक्ष्य प्रस्तुत किए गए, लेकिन आरोपित पक्ष तथाकथित अवैध प्रबंधक न उपस्थित हुए और न ही कोई अभिकथन/साक्ष्य प्रस्तुत किया । इसके विपरीत जानबूझकर समय व्यतीत करते हुए अवैध लाभ पाने के लिए सुनियोजित संधि पूर्वक बिना किसी कारण को अवगत कराए और बिना शिकायतकर्ता को सुने और संज्ञान में लाए जॉच समिति के निर्णय की अंतिम स्थिति में आरोपी पक्ष से गठजोड़ कर जिला विद्यालय निरीक्षक मथुरा द्वारा जॉच समिति को परिवर्तित कर दिया है ।    

जिला विद्यालय निरीक्षक मथुरा द्वारा जांच अधिकारी अचानक आरोपितों के साथ मिलकर बदलने से जॉच परिणाम विधिक रूप से प्रभावित होना स्वाभाविक हैं आरोपित पक्ष को लाभ देना साफ जाहिर होता हैं  श्री गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर दि 26.10.2024 , 29.10.2024, 13.11.2024 , 12.12.2024 एवं 11.04.2025 को जांच हेतु निवेदन किए गए हैं । जिनमें जमुना प्रसाद श्री राम इण्टर कालेज सुरीर मथुरा की प्रबंध समिति को प्रशासन योजना के प्रबंध समिति गठन संबंधी निर्वाचन नियमों की अनदेखी करते हुए , विधिमान्य सोसाइटी से भिन्न नितान्त फर्जी सदस्यों से कपोल कल्पित प्रपत्रों के आधार पर षडयंत्र पूर्वक प्रबंधकीय अनुमन्यता प्रदान की गई है। विद्यालय की प्रबंध समिति गठन की पारदर्शी शुचिता एवं लोकतांत्रिक प्रक्रिया हेतु प्रशासन योजना में नियम उल्लेखित हैं। जिसमें प्रबंध समिति निर्वाचन में सहभागिता करने के लिए कॉलेज/विद्यालय की संचालिका मातृ सोसाइटी जमुना प्रसाद श्री राम शिक्षा समिति,सुरीर,मथुरा का उप निबंधक फर्म्स सोसायटीज एवं चिट्स आगरा से अद्यतन पंजीयन नवीनीकरण, प्रबंध समिति ब उसके साधारण सभा के सदस्यों का 4 बी के अंतर्गत पंजीयन/विधिमान्य होना मुख्य रूप से आवश्यक अर्हता  है। तथाकथित प्रबंधक के पास नहीं है। मेरे पास जमुना प्रसाद श्री राम शिक्षा समिति, सुरीर, मथुरा का पंजीयन नवीनीकरण, प्रबंध समिति ब साधारण सभा के सदस्यों का पंजीकरण है। उपरोक्त आवश्यक अर्हता के साथ निर्वाचन की लोकतांत्रिक शुचिता हेतु जिला विद्यालय निरीक्षक  से निर्वाचन पूर्व अनुमति प्राप्त करना, जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा पर्यवेक्षक नामित करना, नामित पर्यवेक्षक की देखरेख में निर्वाचन कराना, समाचार पत्रों में सदस्यता सूची और निर्वाचन कार्यक्रम का सार्वजनिक प्रकाशन कराना, सहभागी सदस्यों को पंजीकृत डाक से निर्वाचन के लिए सूचना देना, तथा निर्वाचन में परस्पर संबंधी न होने का अनिवार्य नियम प्रशासन योजना में स्पष्ट रूप से  हैं। लेकिन उक्त किन्हीं भी नियमों का पालन  नहीं किया गया है।  उक्त नियमों के विरुद्ध सोसाइटी से भिन्न फर्जी सदस्यों की सूची प्रस्तुत करना,बिना किन्हीं प्रमाणों के कपोल कल्पित निर्वाचन प्रपत्रों को बनाना, षडयंत्र पूर्वक अवैध कब्जा कर लाभ प्राप्त करना सुनियोजित सामूहिक कृत्य दंडनीय अपराध है । प्रबंधकीय अनुमन्यता से पूर्व प्राप्त निर्वाचन प्रपत्रों पर कार्यालय द्वारा उपरोक्त विधिक बिंदुओं पर सम्यक परीक्षण किया जाना आवश्यक व कर्तव्य निष्ठा के अंतर्गत है।बार बार अनुरोध करने के उपरांत भी उक्त बिंदुओं पर कार्यालय द्वारा न कोई परीक्षण किया गया और न अद्यतन प्रभावी कार्यवाही की गई है। उक्त जॉच में भी मेरे शिकायती बिंदुओं का गहन परीक्षण तथा कार्यालय में प्राप्त निर्वाचन पत्रावली का यथोचित सत्यापन अपेक्षित था 
 मेरी  जनसुनवाई शिकायत को शासनादेश होते हुए भी मुझ शिकायतकर्ता से कोई संपर्क किए बिना तथ्यों का गोपन करते हुए पोर्टल पर प्राप्त त्रुटिपूर्ण गलत आख्या दिनांक 16.12.2024 को स्वयं जिला विद्यालय निरीक्षक मथुरा ने आख्या की विरोधाभासी भ्रामक तथ्यों के आधार पुंजित किया गया है मंडलीय समिति/संयुक्त शिक्षा निदेशक के निर्णय दिनांक 11.12.2014 एवं माननीय उच्च न्यायालय में योजित याचिका संख्या 34354/2013 के आदेश का उल्लेख करते हुए प्रबंधकीय मान्यता 24.12.2014 को प्रदेश शासन के पत्र दिनांक 25 जून 2015, एवं संयुक्त  शिक्षा निदेशक आगरा के पत्र दिनांक 22.6.2016 में त्रुटिपूर्ण बताते हुए तत्समय पारित विभागीय जांच के आदेशों को आख्या में गोपित कर लिया गया। वर्ष 2019 में प्रबंधकीय अनुमन्यता के लिए सोसाइटी सदस्यों का 4 बी के अंतर्गत मान्यता की अनिवार्यता को आख्या में स्वीकार किया गया है लेकिन मंडलीय समिति को संदर्भ प्रेषित करते समय माननीय उच्च न्यायालय के आदेश ब संदर्भ प्रेषित करने के कारण को नहीं अवगत कराया जिससे उस समय संदर्भित निर्वाचन पत्रावली को संयुक्त शिक्षा निदेशक आगरा द्वारा इसी कथन के साथ प्रत्यावर्तित किया गया इसी संदर्भ में माननीय उच्च न्यायालय में योजित याचिका 21947/2022 के आदेश दिनांक 17.08.2022 का उल्लेख किया है उसमें भी जिला विद्यालय निरीक्षक मथुरा द्वारा निर्वाचन परीक्षण के निर्देश हैं लेकिन ऐसा नहीं किया गया। वर्तमान तथाकथित कपोल कल्पित निर्वाचन दिनांक 27.09.2024 के विषय में स्थिति निवेदन किए जाने के उपरांत भी प्रबंधकीय हस्ताक्षर प्रमाणन में जिन शासनादेश का उल्लेख किया है वे कदापि विवादपूर्ण स्थितियों में नहीं हैं। किसी शिक्षा अधिनियम, प्रशासन योजना,शासनादेश, माननीय उच्च न्यायालय का कोई आदेश नहीं है कि सोसाइटी से भिन्न नितान्त फर्जी सदस्यों को नियमों की अनदेखी करते हुए प्रबंधकीय अनुमन्यता प्रदान कर दी जाय।

इस संदर्भ में दिनांक 23.10.2024 को मेरे द्वारा  जनसूचनाधिकार के अंतर्गत वांछित सूचनाएं भी मांगी गई जो उपलब्ध नहीं कराई गई एवं अपीलीय अधिकारी के अनेक निर्देशों के बाद भी उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं।संयुक्त शिक्षा निदेशक आगरा के अनेक बार प्रेषित निर्देश पत्रों को गोपित कर निरन्तर कार्यवाही की निष्क्रियता से संस्था हित, उद्देश्य, न्याय एवं व्यक्तिगत मौलिक अधिकार बाधित हो रहे हैं । जब इस संबध मे रविन्द्र सिंह जिला विद्यालय निरीक्षक मथुरा से फोन पर एवं व्हाट्स अप मेसेज द्वारा उनका पक्ष जानने हेतु प्रयास किया उन्होने कोई उत्तर नहीं दिया। जिससे साफ जाहिर होता है कि खेला तगड़ा हो रहा है

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