मंडी स्थित इफ्को सेंटर पर किसानों के साथ सेल्समैन की बदसलूकी, यूरिया खाद के साथ अन्य उत्पाद न लेने पर भगाये जा रहे हैं अन्नदाता
शाहाबाद हरदोई। देश में गारंटी वाली डबल इंजन की सरकार में देश को रोटी की गारंटी देने वाले अन्नदाता को खाद बीज के नाम पर खुले बाजार में कैसे लूटा जाता है यह सर्वविदित है।इसी लूट से बचने के लिए वह सरकार के नियंत्रणाधीन इफको बिक्री केंद्र पर जाता है लेकिन इफको बिक्री केंद्रों पर बैठे सेल्समैन पूरी तरह मनमानी पर उतारू हो जाते हैं। इतना ही नहीं गरीब किसान को सम्मान देने के बजाय उनको अपशब्द बोलकर बेइज्जती और कर दी जाती है। जबकि किसान कैसे अन्न उपजाकर देश की रोटी का प्रबंध करता है। इस ओर किसी का ध्यान नहीं जाता है। किसान हथेली पर जान रखकर एक पन्नी के सहारे बरसात की अंधेरी रातों में मचान पर बैठकर आवारा जानवरों से फसल बचाकर तैयार करता है। बैंक से लेकर साहूकार तक के कर्ज के बोझ तले दबे किसान की वैसे भी कमर टूटी रहती है। ऊपर से प्राकृतिक आपदा किसानों पर मुसीबत का पहाड़ बनकर आ जाती है।अभी हाल में गर्रा नदी में आयी भंयकर बाढ़ से नदी के आस पास गांवों के किसानों के सारे अरमान पानी में बह गये। उनके सपनों का महल रेत की तरह ढह गया। सारी फसलें चौपट हो गयी। राहत के नाम पर राजस्व कर्मियों की मनमानी से बहुत से किसानों को क्षतिपूर्ति के लाले पड़ते दिखाई दे रहे हैं।ऐसे में किसान अपनी पत्नियों की पायल, मंगलसूत्र गिरवी रखकर दुबारा फसलों की बुवाई कर देश के लिए अन्न के प्रबंध में जुट गये है। जैसे तैसे 300 रू जोड़कर फटे हाल किसान एक दो बोरी यूरिया लेने के लिए इफको बिक्री केंद्र पर पहुंच पा रहे हैं। लेकिन कमरों में बंद सेल्समैन का कलेजा इनकी दीन दशा देखकर भी नहीं पिघलता है। जींस टी शर्ट पहने सेल्समैन जब दीन-हीन किसानों पर अपना रूआब झाड़ते है तो ऐसा लगता है कि भारत जैसा विशाल राष्ट्र की पूरी ताकत इन लोगों में ही समाहित हो गयी है। खाद के लिए लानत मलानत सहते हुए इन किसानों का कलेजा तब फट जाता है जब सेल्समैन द्वारा यूरिया की बोरी के साथ ,नैनो यूरिया,नैनो डीएपी,जिंक व अन्य उत्पाद खरीदने के लिए बिवश किया जाता है। किसान द्वारा अपनी विवशता बतायी जाती है तो सेल्समैन द्वारा अभद्र भाषा का प्रयोग कर उसे अपमानित किया जाता है। इतना ही नहीं उसे बिना खाद दिये सेंटर से भगा दिया जाता है। लाख मिन्नते करने पर भी जब सेंटर पर उसे खाद नहीं मिलती तो मजबूरन किसान अपना मन मसोस कर रूआसे मन से बाजार में महंगी खाद खरीदने को बाध्य हो जाता है। जबकि किसानों को लेकर बड़ी बड़ी बात करने वाली सरकारों के प्रतिनिधि किसानों की इन समस्याओं पर बात करना भी उचित नहीं समझते। सरकार ने किसानों की इन समस्याओं के निराकरण के लिए कृषि विभाग जैसा विभाग बनाकर एक लम्बी फौज तैनात की है लेकिन इसी फौज की आंखों के सामने किसान खाद बीज के नाम पर दिनदहाड़े लुटने को मजबूर हैं। सबसे मजे की बात तो यह है कि जीरो टालरेंस का दावा करने वाली सरकार के अधिकारी आज तक यूरिया जैसी खाद कंट्रोल रेट पर बाजार में नहीं उपलब्ध करा सका है। इफको सेंटर पर किसानों को आ रही समस्या को लेकर इफको के जिला प्रबंधक आकाश चौबे से दूरभाष पर बात की गयी तो उन्होंने बताया कि शाहाबाद मंडी में स्थित इफ्को सेंटर सुबह 9 बजे खुलता है, और शाम 4 बजे बंद हो जाता है। 4 बजे के बाद सेल्समैन बैंक में पैसा जमा करने चला जाता है। उन्होंने बताया कि किसानों को यूरिया के साथ अन्य उत्पाद लेने की बाध्यता नहीं है। जिसकी इच्छा हो वह खरीदें इच्छा न हो न खरीदें। किसानों को अन्य उत्पाद लेने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है। जोगीपुर नौसारा के सुरेश चंद्र और मनिकापुर बमियारी के वेद राम राजपूत जब यूरिया क्रय करने के लिए गए तो उन्हें 45 रुपए की एक नैनो की शीशी दी गई उन्होंने असमर्थता जाताई तो उनसे सेल्समैन द्वारा कहा गया कि तो फिर खाद भी नहीं मिल पाएगी। मजबूर होकर दोनों किसानों ने यूरिया के साथ नैनो जिंक की शीशी भी खरीदी। जिला प्रबंधक का यह कहना है कि किसने को अन्य उत्पाद खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जाता है। जबकि यह दो किसान इस बात का प्रमाण है कि सेल्समैन द्वारा पूरी तरह से मनमानी की जा रही है।
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