भ्रष्टाचार में डूबा शाहजहांपुर का राजस्व विभाग — किसानों से वसूली के बिना नहीं चलता सिस्टम
शाहजहांपुर (उत्तर प्रदेश) (आरएनआई) प्रदेश में “भ्रष्टाचार मुक्त शासन” और “जीरो टॉलरेंस” की नीति का ढिंढोरा भले ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार पीटते हों, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। प्रदेश के वित्त मंत्री के गृह जनपद शाहजहांपुर में राजस्व विभाग में भ्रष्टाचार सिर चढ़कर बोल रहा है।
जनपद की किसी भी तहसील में बिना सुविधा शुल्क (घूस) के कोई भी कार्य कराना लगभग असंभव हो गया है। लेखपाल से लेकर तहसीलदार तक के अधिकारी सरकार के आदेशों की खुलकर अवहेलना कर रहे हैं और किसानों का लगातार शोषण कर रहे हैं।
किसानों का कहना है कि भूमि का बैनामा (रजिस्ट्री) कराने के बाद दाखिल-खारिज की प्रक्रिया पूरी करने में उन्हें अत्यधिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लेखपाल से लेकर तहसीलदार तक लाखों रुपये तक के सुविधा शुल्क की मांग की जाती है। इतना ही नहीं, किसानों को अपने कार्य के लिए तहसील के सैकड़ों चक्कर लगाने पड़ते हैं, और कई बार 10-10 महीने तक दाखिल-खारिज नहीं हो पाता।
जबकि प्रदेश सरकार के स्पष्ट आदेश हैं कि बैनामा कराने के बाद दाखिल-खारिज के लिए किसान की उपस्थिति आवश्यक नहीं है, क्योंकि भूमि का बैनामा कराते समय रजिस्ट्रार कार्यालय में शपथ पत्र के साथ बैनामे की प्रमाणित प्रति जमा की जाती है। यह पत्रावली रजिस्ट्रार कार्यालय से सीधे संबंधित तहसील में भेजी जाती है, जिस पर रजिस्ट्रार के हस्ताक्षर एवं मोहर होती है।
सरकार के निर्देश हैं कि रजिस्ट्रार कार्यालय से प्राप्त पत्रावली के आधार पर ही दाखिल-खारिज की प्रक्रिया पूरी की जाए और इसमें किसान की व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक नहीं है। लेकिन तहसीलों में इन आदेशों को दरकिनार किया जा रहा है। नायब तहसीलदार और कानूनगो अपनी मनमानी करते हुए पत्रावलियों को बैनामा व शपथ पत्र के अभाव का हवाला देकर खारिज कर देते हैं।
बेचारा किसान बार-बार तहसील के चक्कर लगाता है, फिर भी उसका कार्य तब तक नहीं होता जब तक कि उससे मोटी रकम का सुविधा शुल्क न ले लिया जाए। इस प्रकार किसानों का खुलेआम शोषण अब राजस्व विभाग में आम बात बन चुकी है।
सबसे आश्चर्य की बात यह है कि प्रदेश के वित्त मंत्री के गृह जनपद में इस तरह का भ्रष्टाचार और किसानों का शोषण होने के बावजूद सरकार की नजर इस पर नहीं पड़ रही। जबकि तहसील में फैले भ्रष्टाचार की शिकायतें आए दिन माननीय मंत्री तक पहुंचती रहती हैं। फिर भी तहसील के भीतर भ्रष्ट अधिकारी सुरक्षित हैं और भ्रष्टाचार की गंगोत्री में नहाते हुए बेखौफ अपना खेल जारी रखे हुए हैं।
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