भारत पहुंचे जर्मन विदेश मंत्री वेडफुल, बोले- भारत-जर्मनी के संबंध बेहद घनिष्ठ

विदेश मंत्रालय ने कहा कि जर्मन विदेश मंत्री दो और तीन सितंबर को भारत में रहेंगे। वह पहले भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का दौरा करेंगे। तीन सितंबर को वेडफुल केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात करेंगे। इसके बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ बैठक करेंगे। 

Sep 2, 2025 - 10:59
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भारत पहुंचे जर्मन विदेश मंत्री वेडफुल, बोले- भारत-जर्मनी के संबंध बेहद घनिष्ठ

बेंगलुरु (आरएनआई) जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान डेविड वेडफुल भारत की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर मंगलवार सुबह बंगलूरू पहुंचे। अपने दो दिवसीय दौरे पर वह इसरो कार्यालय जाएंगे। बाद में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और एस जयशंकर से मुलाकात करेंगे। भारत आने से पहले जर्मनी के विदेश मंत्री वेडफुल ने कहा कि दोनों देशों के बीच घनिष्ठ द्विपक्षीय संबंध हैं। 

विदेश मंत्रालय ने कहा कि जर्मन विदेश मंत्री दो और तीन सितंबर को भारत में रहेंगे। वह पहले भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का दौरा करेंगे। तीन सितंबर को वेडफुल केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात करेंगे। इसके बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ बैठक करेंगे। 

अपनी यात्रा से पहले जर्मन विदेश मंत्री ने भारत-प्रशांत क्षेत्र और वैश्विक मंच पर एक प्रमुख भागीदार के रूप में भारत की भूमिका के बारे में बात की। एक्स पर पोस्ट में वेडफुल ने जर्मनी और भारत के बीच घनिष्ठ राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों पर जोर दिया। उन्होंने सुरक्षा सहयोग, नवाचार, प्रौद्योगिकी और कुशल कार्यबल भर्ती जैसे क्षेत्रों को द्विपक्षीय संबंधों का प्रमुख स्तंभ बताया। 

वेडफुल ने कहा कि भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक प्रमुख साझेदार है। हमारे राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से घनिष्ठ संबंध हैं। हमारी रणनीतिक साझेदारी के विस्तार की अपार संभावनाएं हैं। सुरक्षा सहयोग से लेकर नवाचार और प्रौद्योगिकी और कुशल श्रमिकों की भर्ती तक।

उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश और सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत की आवाज रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र से परे भी सुनी जाती है। इसीलिए मैं बंगलूरू और नई दिल्ली की यात्रा कर रहा हूं।

जर्मन विदेश मंत्री ने जर्मनी और भारत जैसे लोकतंत्रों के बीच स्वाभाविक गठबंधन पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत हमारी सदी की अंतराष्ट्रीय व्यवस्था को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभाता है। हम लोकतंत्र इसमें स्वाभाविक साझेदार हैं। विशाल भू-राजनीतिक चुनौतियों को देखते हुए हमें मिलकर नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखना चाहिए।

पिछले महीने नई दिल्ली में जयशंकर की जर्मन सांसद जुर्गन हार्ड्ट से मुलाकात के बाद हो रही है। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों और वैश्विक विकास पर चर्चा की थी। जर्मनी यूरोप में भारत के सबसे अहम साझेदारों में से एक है। दोनों देशों के बीच एक मज़बूत रणनीतिक साझेदारी है। जो पिछले दशकों में लगातार बढ़ी है। मार्च 2021 में दोनों पक्षों ने राजनयिक संबंधों के 70 वर्ष पूरे किए।

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