ब्रज क्षेत्र में लाल–पीले वस्त्रधारी कथित साधुओं की पहचान सुनिश्चित करने की मांग तेज

Nov 25, 2025 - 18:27
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ब्रज क्षेत्र में लाल–पीले वस्त्रधारी कथित साधुओं की पहचान सुनिश्चित करने की मांग तेज

मथुरा (आरएनआई) उत्तराखंड की तर्ज पर ब्रज क्षेत्र में भी लाल और पीले वस्त्र पहनने वाले साधु-संतों की पहचान सुनिश्चित किए जाने की मांग उठने लगी है। हाल के दिनों में साधु वेश धारण कर आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने वाले मामलों ने धार्मिक समुदाय और प्रशासन, दोनों को चिंतित कर दिया है। मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन, बरसाना और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में साधु-संत आते-जाते हैं, लेकिन उनमें से अनेक की पहचान का कोई पंजीकरण या सत्यापन नहीं होता, जिसके कारण असामाजिक तत्वों को साधु वेश धारण कर खुले में संचालित होने का अवसर मिल जाता है।

उत्तराखंड सरकार ने हाल ही में “ऑपरेशन कालनेमि” नाम से एक अभियान शुरू किया है, जिसका उद्देश्य ऐसे लोगों की पहचान करना है जो साधु का वेष धारण कर आपराधिक या संदिग्ध गतिविधियों में शामिल रहते हैं। इस अभियान के अंतर्गत आश्रमों, मठों और धर्मस्थलों में रहने वाले साधु-संतों का सत्यापन किया जा रहा है, ताकि अपराधियों और बाहरी तत्वों को धूर्तता से धार्मिक वेश का उपयोग करने से रोका जा सके। उत्तराखंड में यह अभियान लगातार परिणाम दे रहा है और कई संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान की गई है। ऐसे में मांग उठने लगी है कि ब्रज क्षेत्र में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू की जाए।

ब्रज एक अंतरराष्ट्रीय धार्मिक तीर्थस्थल है, जहां रोजाना हजारों साधु-संत, श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। धार्मिक आस्था और परंपरा के कारण यहां आने वाले साधुओं का स्वतंत्र रूप से आवागमन होता है। कई स्थानीय संगठनों का कहना है कि इसी स्वतंत्रता का लाभ उठाकर अपराधी तत्व भेष बदलकर क्षेत्र में सक्रिय रहते हैं और न तो उनकी पहचान पक्की होती है और न ही गतिविधियों की निगरानी संभव हो पाती है।

मथुरा और वृंदावन के कई संतों ने प्रशासन से मांग की है कि साधु वेश में आने वाले व्यक्तियों की पहचान, सत्यापन और पंजीकरण की एक व्यवस्थित प्रक्रिया लागू की जाए, ताकि अपराधियों को धार्मिक छवि की आड़ में कानून से बचने का अवसर न मिल सके। उनका कहना है कि यह न सिर्फ धर्म और समाज की सुरक्षा का मामला है, बल्कि साधु समाज की गरिमा और पवित्रता बनाए रखने के लिए भी आवश्यक है।

स्थानीय प्रशासन और पुलिस भी इस विषय पर विचार कर रही है, ताकि धार्मिक प्रतिष्ठान और आश्रम इस व्यवस्था में सहयोग देते हुए क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर सकें। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इस विषय पर ठोस पहल देखने को मिल सकती है।

महेश रावत 
मुख्य संपादक "छोटी सी बात"

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