नए साल के संबोधन में शी जिनपिंग ने ताइवान पर दावा दोहराया, ताइपे ने संप्रभुता की रक्षा का संकल्प जताया
बीजिंग (आरएनआई)। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने नए साल की पूर्व संध्या पर देश को संबोधित करते हुए ताइवान पर चीन के दावे को एक बार फिर दोहराया और उसे “अपरिहार्य” बताया। इसके जवाब में ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने अपने नए साल के संदेश में देश की संप्रभुता की रक्षा और आत्मरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने का संकल्प दोहराया।
अपने संबोधन में शी जिनपिंग ने कहा कि ताइवान जलडमरूमध्य के दोनों किनारों के लोगों के बीच खून और सांस्कृतिक रिश्तों का गहरा बंधन है और “मातृभूमि का एकीकरण रोका नहीं जा सकता।” उन्होंने इसे समय की मांग बताते हुए कहा कि चीन ताइवान को अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है। शी जिनपिंग ने इस दौरान चीन की तकनीकी प्रगति पर भी जोर दिया और कहा कि देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, सैन्य तकनीक और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने पिछले वर्षों में नवाचार और उच्च गुणवत्ता वाले विकास के लिए चीनी नागरिकों की सराहना भी की।
गौरतलब है कि शी का यह बयान ऐसे समय आया है जब चीन ने हाल ही में ताइवान के आसपास सैन्य अभ्यास किए हैं और नौसैनिक जहाज भी तैनात किए हैं। यह गतिविधियां उस पृष्ठभूमि में हो रही हैं जब अमेरिका ताइवान को हथियारों की आपूर्ति बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है।
इस बीच ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने अपने नए साल के भाषण में चीन की बढ़ती विस्तारवादी महत्वाकांक्षाओं पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय यह देख रहा है कि ताइवान के लोग अपनी आज़ादी और लोकतंत्र की रक्षा के लिए कितने दृढ़ हैं। लाई ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा, मजबूत रक्षा प्रणाली और एक प्रभावी लोकतांत्रिक व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देगी।
ताइवान ने हाल ही में रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। पिछले वर्ष देश ने करीब 40 अरब डॉलर का विशेष रक्षा बजट घोषित किया था, जिसमें “ताइवान डोम” नामक वायु रक्षा प्रणाली का विकास भी शामिल है। यह बजट 2026 से 2033 के बीच चरणबद्ध तरीके से खर्च किया जाएगा। राष्ट्रपति लाई ने चीन की सैन्य धमकियों के बीच रक्षा खर्च को सकल घरेलू उत्पाद के 5 प्रतिशत तक बढ़ाने का भी वादा किया और कहा कि मौजूदा हालात में ताइवान के पास इंतजार करने का समय नहीं है।
नए साल के मौके पर बीजिंग और ताइपे से आए इन बयानों ने एक बार फिर ताइवान जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर वैश्विक चिंता को उजागर कर दिया है।
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