पोर्टलैंड में सैनिकों की तैनाती पर रोक — अमेरिकी जज ने फिर लगाई ट्रंप प्रशासन को फटकार

Nov 3, 2025 - 15:27
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पोर्टलैंड में सैनिकों की तैनाती पर रोक — अमेरिकी जज ने फिर लगाई ट्रंप प्रशासन को फटकार

वॉशिंगटन (आरएनआई) — अमेरिका के ओरेगन राज्य की संघीय अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को पोर्टलैंड में नेशनल गार्ड तैनात करने से रोक दिया है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि शहर में हालात नियंत्रण से बाहर होने का कोई विश्वसनीय सबूत नहीं मिला है, इसलिए यह कदम संविधान और संघीय कानून का उल्लंघन है।

यह आदेश अमेरिकी जिला न्यायाधीश करीन इम्मरगट ने दिया, जो स्वयं ट्रंप द्वारा नियुक्त की गई थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि घरेलू स्तर पर सेना की तैनाती तभी संभव है जब सार्वजनिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाए — लेकिन पोर्टलैंड में ऐसी स्थिति नहीं है।

मामले की सुनवाई के दौरान ट्रंप प्रशासन ने यह तर्क दिया था कि नेशनल गार्ड की तैनाती का मकसद संघीय संपत्तियों की सुरक्षा करना था, क्योंकि शहर में इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एन्फोर्समेंट (ICE) कार्यालय के बाहर प्रदर्शन हो रहे थे। हालांकि अदालत ने माना कि ये प्रदर्शन सीमित दायरे में और शांतिपूर्ण थे।

जज इम्मरगट ने कहा, “कोर्ट को ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है जिससे यह साबित हो सके कि पोर्टलैंड में कानून-व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ चुकी थी। प्रशासन का यह कदम असंवैधानिक है और घरेलू तैनाती से जुड़े संघीय कानून का उल्लंघन करता है।”

यह फैसला तीन दिन चली सुनवाई के बाद आया, जिसमें दोनों पक्षों ने 750 से अधिक दस्तावेज और गवाहियां प्रस्तुत कीं। अदालत शुक्रवार को इस पर अंतिम आदेश जारी करेगी।

यह मामला उन कई विवादों में से एक है, जिनमें ट्रंप प्रशासन द्वारा विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए सेना की तैनाती को लेकर कानूनी टकराव हुआ है। इससे पहले भी ट्रंप ने लॉस एंजेलिस, वॉशिंगटन डी.सी., शिकागो और मेम्फिस जैसे शहरों में सैनिक भेजने या भेजने की धमकी दी थी।

पिछले महीने लॉस एंजेलिस में एक अन्य अदालत ने ट्रंप प्रशासन द्वारा तैनात किए गए 4700 सैनिकों और मरीन की तैनाती को गैरकानूनी करार दिया था, हालांकि 300 सैनिकों को सीमित भूमिका में बने रहने की अनुमति दी गई थी — बशर्ते वे नागरिक कानून लागू न करें।

ओरेगन राज्य सरकार ने कोर्ट के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि “पोर्टलैंड को सेना नहीं, बल्कि संविधान पर भरोसा चाहिए।” यह फैसला ट्रंप प्रशासन की उस नीति को एक और बड़ा झटका है, जिसमें वह घरेलू असंतोष को दबाने के लिए सैन्य शक्ति के प्रयोग पर जोर देता रहा है।

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