ट्यूनीशिया में सरकार के खिलाफ फूटा जनआक्रोश, राजधानी की सड़कों पर उतरे हजारों प्रदर्शनकारी

Nov 23, 2025 - 09:45
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ट्यूनीशिया में सरकार के खिलाफ फूटा जनआक्रोश, राजधानी की सड़कों पर उतरे हजारों प्रदर्शनकारी

ट्यूनिस (आरएनआई)। उत्तरी अफ्रीकी देश ट्यूनीशिया में राजनीतिक तनाव तेजी से बढ़ता जा रहा है। शनिवार को हजारों की संख्या में लोग राजधानी ट्यूनिस की सड़कों पर उतर आए और राष्ट्रपति काइस सईद की नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि राष्ट्रपति सईद न्यायपालिका में हस्तक्षेप कर रहे हैं और राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल कर रहे हैं।

यह विरोध प्रदर्शन 'अन्याय के खिलाफ' बैनर के तले आयोजित किया गया, जिसका नेतृत्व जेल में बंद राजनीतिक कैदियों के परिवारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने किया। प्रदर्शनकारी जेल में बंद विपक्षी नेताओं की रिहाई और सरकार द्वारा बढ़ते दमन के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। बताया गया कि हजार से अधिक लोग मार्च में शामिल हुए और सरकार-विरोधी नारे लगाए। इस बीच ट्यूनीशिया आर्थिक और राजनीतिक संकट के दौर से गुजर रहा है, जिससे जन असंतोष और तेज हो गया है।

प्रदर्शन उस समय हो रहे हैं जब इससे पहले गुरुवार को पत्रकारों ने भी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किए थे। पत्रकारों ने आरोप लगाया कि सरकार प्रेस की स्वतंत्रता को दबाने की कोशिश कर रही है और प्रमुख नागरिक समाज संगठनों पर कार्रवाई की जा रही है।

विपक्षी नेता अब्देलहामिद जलसी की पत्नी मोनिया ब्राहिम ने मार्च में शामिल होकर कहा कि कई ट्यूनीशियाई लोगों के साथ अन्याय हो रहा है और वह एक नागरिक के रूप में अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क पर उतरी हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक कैदी अपने सिद्धांतों और राजनीतिक सक्रियता की कीमत चुका रहे हैं और उन्हें सरकार ने बंधक बनाकर रखा हुआ है। इनमें से कई कैदी भूख हड़ताल पर हैं, जिनमें संवैधानिक कानून के प्रोफेसर ज़ाहेर बेन म्बारेक भी शामिल हैं, जो 20 दिनों से अधिक समय से भूख हड़ताल जारी रखे हुए हैं।

ट्यूनीशिया में बढ़ती कठोर कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी चिंता जताई है। ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि 2022 के अंत से अब तक 50 से अधिक राजनेता, वकील, एक्टिविस्ट और पत्रकारों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का इस्तेमाल करने के लिए गिरफ्तार किया गया है। संगठन का आरोप है कि बड़े पैमाने पर एंटी-टेररिज्म और साइबर क्राइम कानूनों का इस्तेमाल असहमति को दबाने के लिए किया जा रहा है।

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