गाजा में दो वर्षों की तबाही: 13 परमाणु बमों के बराबर विस्फोट, 15 साल तक हटता रहेगा मलबा – संयुक्त राष्ट्र

Oct 14, 2025 - 10:51
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गाजा में दो वर्षों की तबाही: 13 परमाणु बमों के बराबर विस्फोट, 15 साल तक हटता रहेगा मलबा – संयुक्त राष्ट्र

गाजा सिटी (आरएनआई) संयुक्त राष्ट्र की नई चेतावनी में गाजा पट्टी की तबाही को आधुनिक इतिहास के सबसे भीषण मानवीय और संरचनात्मक विनाशों में से एक बताया गया है। विभिन्न यूएन एजेंसियों की समेकित रिपोर्टों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में इस्राइल की कार्रवाई में गाजा पर लगभग दो लाख टन विस्फोटक गिराए गए, जिनका प्रभाव 13 परमाणु बमों के बराबर माना गया है।

मानव हानि का भयावह रिकॉर्ड

संयुक्त राष्ट्र मानवीय राहत एजेंसी (OCHA), डब्ल्यूएचओ और यूएनआरडब्ल्यूए की अक्टूबर 2025 तक की रिपोर्ट के अनुसार:

1.52 लाख से अधिक मौतें दर्ज

इनमें से 1.8 लाख मौतों की पुष्टि

43,000 से ज्यादा लोग लापता या मलबे में दबे

3.72 लाख घायल, जिनमें 60% से अधिक महिलाएं और बच्चे

मृतकों में 423 स्वास्थ्यकर्मी, 179 पत्रकार और 247 राहतकर्मी शामिल

गाजा अब ‘अननिवास योग्य क्षेत्र’

यूएनडीपी की अक्टूबर 2025 की “रिकंस्ट्रक्शन इंडेक्स ऑफ गाजा” रिपोर्ट बताती है:

1,05,800 से अधिक इमारतें पूरी तरह नष्ट

हर 10 में से 8 इमारतें खंडहर

90% से ज्यादा परिवार बेघर या विस्थापित

95% बहुमंजिला इमारतें जमींदोज

गाजा में फैला 6 करोड़ टन से अधिक मलबा – सीरिया के अलेप्पो युद्ध से तीन गुना

विश्व बैंक व यूएनडीपी के संयुक्त आकलन में बताया गया है:

मलबा हटाने में अनुमानित लागत 24 अरब डॉलर

यह राशि फलस्तीनी वार्षिक जीडीपी से चार गुना अधिक

इंजीनियरिंग परिषद का अनुमान: मलबा हटाने में ही 12–15 वर्ष लगेंगे

युद्धविराम के बावजूद अनिश्चितता

दो वर्ष बाद हिंसा थमने के संकेत तब मिले जब हमास ने युद्धविराम समझौते के तहत 20 इस्राइली बंधकों को रेड क्रॉस के हवाले किया। इसके बदले 1,900 फलस्तीनी कैदियों की रिहाई की शर्त मानी गई।
इस कदम के बाद गाजा और इस्राइल दोनों में जश्न का माहौल देखने को मिला, लेकिन स्थायी शांति की राह अभी अस्पष्ट है।

इस्राइल वेस्ट बैंक में नई कॉलोनियां बसाना चाहता है

हमास इसका विरोध जारी रखेगा

अगला चरण कैदी विनिमय और राजनीतिक समझौतों पर निर्भर करेगा

बारूद से झुलसा भूगोल, चुनौतीपूर्ण पुनर्निर्माण

विशेषज्ञ मानते हैं कि गाजा इस समय केवल एक युद्धग्रस्त इलाका नहीं बल्कि एक ऐसे मानवीय संकट का प्रतीक है जिसे पुनर्स्थापित करने में एक दशक से अधिक समय, संसाधन और वैश्विक सहयोग की जरूरत होगी।

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