कायस्थ समाज में चित्रगुप्त भगवान की पूजा, 7235 संख्या वाले अखिल भारतीय महासभा के अध्यक्ष रमाशंकर ने बताया महत्व
कांकेर (आरएनआई) अखिल भारतीय कायस्थ महासभा 7235 के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष रमाशंकर श्रीवास्तव ने चर्चा के दौरान बताया कि,चित्रगुप्त भगवान कायस्थ समाज के प्रमुख आराध्य देवता हैं। उन्हें यमराज के लेखक के रूप में भी जाना जाता है, जो हर जीव के कर्मों का लेखा-जोखा रखते हैं। चित्रगुप्त भगवान को धर्म और न्याय के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है।चित्रगुप्त भगवान की महत्ता है की चित्रगुप्त भगवान को यह संसार के हर जीव के कर्मों का लेखा-जोखा रखने वाले के रूप में माना जाता है। वे यमराज के दरबार में प्रत्येक जीव के अच्छे और बुरे कर्मों का हिसाब रखते हैं। चित्रगुप्त भगवान को धर्म और न्याय के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। वे हर जीव के कर्मों के अनुसार न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। चित्रगुप्त भगवान कायस्थ समाज के प्रमुख आराध्य देवता हैं। कायस्थ समाज में उनकी पूजा की जाती है और उन्हें अपने पूर्वजों के रूप में माना जाता है।चित्रगुप्त भगवान की पूजा कायस्थ समाज में बहुत महत्व रखती है। उनकी पूजा से व्यक्ति को धर्म और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। चित्रगुप्त भगवान की कृपा से व्यक्ति अपने कर्मों को सुधारने और धर्म के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित होता है।चित्रगुप्त भगवान कायस्थ समाज के एक मत्वपूर्ण आराध्य देवता हैं। वे कर्मों के लेखा-जोखा रखने वाले और धर्म-न्याय के प्रतीक के रूप में पूजे जाते हैं। उनकी पूजा और महत्व कायस्थ समाज में बहुत अधिक है।
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