अफगानिस्तान-पाकिस्तान शांति वार्ता फिर विफल, सीमा पार आतंकवाद पर नहीं बनी सहमति
इस्लामाबाद (आरएनआई)। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच चल रही शांति वार्ता एक बार फिर बेनतीजा रही। दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच सीमा पार आतंकवाद पर ठोस समझौता नहीं हो सका, जिससे वार्ता गतिरोध में पहुंच गई। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि अब चौथे दौर की कोई योजना नहीं है और वार्ता पूरी तरह रुक गई है।
दो दिन चली यह वार्ता गुरुवार को शुरू हुई थी। पाकिस्तान ने अफगान तालिबान से तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के आतंकियों पर कार्रवाई की मांग की थी, जो अफगान धरती से पाकिस्तान पर हमले कर रहे हैं। ख्वाजा आसिफ ने एक निजी टीवी चैनल से कहा कि अफगान पक्ष केवल मौखिक भरोसे पर बात खत्म करना चाहता था, जबकि अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं में मौखिक आश्वासन पर्याप्त नहीं होते। उन्होंने तुर्किये और कतर के ईमानदार प्रयासों की सराहना की, जिन्होंने मध्यस्थ की भूमिका निभाई।
रक्षा मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान का रुख साफ है—अफगानिस्तान को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसकी जमीन का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ किसी आतंकी गतिविधि में न हो। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अफगान धरती से हमला हुआ, तो पाकिस्तान जवाब देगा।
पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ताउल्ला तारार ने भी बयान जारी करते हुए कहा कि अब जिम्मेदारी अफगान तालिबान की है कि वह आतंकवाद पर नियंत्रण को लेकर अपने अंतरराष्ट्रीय और द्विपक्षीय वादों को निभाए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का अफगान जनता से कोई वैर नहीं है, लेकिन वह ऐसी किसी नीति का समर्थन नहीं करेगा जो अफगान लोगों या पड़ोसी देशों के हितों के खिलाफ हो।
पहली वार्ता 19 अक्तूबर को दोहा में, दूसरी 25 अक्तूबर को इस्तांबुल में और तीसरा दौर इस हफ्ते इस्लामाबाद में हुआ, लेकिन तीनों बैठकें किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचीं। इससे पहले दोनों देशों की सीमाओं पर हुई झड़पों में कई लोगों की मौत हो चुकी है।
तुर्किये और कतर की मध्यस्थता से तीसरे दौर की वार्ता संभव हो पाई थी। तुर्की विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों पक्षों ने सीजफायर जारी रखने और निगरानी तंत्र बनाने पर सहमति जताई थी, लेकिन पाकिस्तान का कहना है कि अफगान भूमि से उसके खिलाफ आतंकी हमले अब बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। पाक सैन्य प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने कहा कि अफगानिस्तान में टीटीपी के लड़ाकों को पनाह दी जा रही है और अगर बातचीत से हल नहीं निकला, तो पाकिस्तान कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित रखता है।
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