अन्नदाता पर 'दवाई' का कहर! गलत कीटनाशक ने जलाई धनिया की फसल, न्याय के लिए दूसरी बार जनसुनवाई पहुंचे विवश किसान

Tuesday, January 27, 2026 - 20:44
Updated: 6 months ago
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अन्नदाता पर 'दवाई' का कहर! गलत कीटनाशक ने जलाई धनिया की फसल, न्याय के लिए दूसरी बार जनसुनवाई पहुंचे विवश किसान

गुना (आरएनआई) जिले के बमोरी ब्लॉक अंतर्गत ग्राम विशनवाड़ा और मानपुर के किसानों के लिए 'श्रीराम कृषि सेवा केंद्र' की एक सलाह बर्बादी का सबब बन गई है। दुकानदार द्वारा धनिया की फसल के लिए अनुपयुक्त और तकनीकी रूप से प्रतिबंधित दवा बेचने के कारण दर्जनों किसानों की लहलहाती फसल जलकर राख हो गई है। मुआवजे और कार्रवाई की मांग को लेकर मंगलवार को पीड़ित किसान दूसरी बार जिला मुख्यालय पहुंचे और जनसुनवाई में कलेक्टर के समक्ष अपनी व्यथा सुनाई।

बिना योग्यता के बांट रहे 'जहर', धनिया के लिए बनी ही नहीं थी दवा मामले में चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि जिस 'ट्रेक्स' नामक कीटनाशक को दुकानदार ने धनिया की फसल में डालने के लिए किसानों को दिया, वह असल में धनिया के लिए बनी ही नहीं है। दवा की बोतल पर कहीं भी धनिया की फसल का उल्लेख नहीं है। जानकारों का कहना है कि कृषि केंद्र चलाने के लिए कृषि विज्ञान या संबंधित विषय में डिग्री अनिवार्य है, ताकि सही परामर्श दिया जा सके, लेकिन यहाँ बिना किसी विशेषज्ञता के दुकानदार ने किसानों की लाखों की मेहनत पर पानी फेर दिया।।- सीताराम नाटानी

टैक्स चोरी और फर्जीवाड़े की बू: बिल में GST गायब किसानों ने जनसुनवाई में जो 'पक्का बिल' पेश किया है, वह भी संदेह के घेरे में है। बिल पर न तो बैच नंबर अंकित है और न ही SGST/CGST का हवाला दिया गया है। किसानों का आरोप है कि दुकानदार ने न केवल गलत दवा दी, बल्कि नियमों को ताक पर रखकर टैक्स चोरी भी की है। जब किसान शिकायत लेकर दुकान पहुंचे, तो संचालक ने संवेदनहीनता की हद पार करते हुए कह दिया— "फसल जल गई तो जल गई, मेरे पास कोई मुआवजा नहीं है।"

अधिकारियों की सुस्ती पर उठे सवाल किसानों का आरोप है कि इस गंभीर लापरवाही के बावजूद अब तक कृषि विभाग की टीम ने खेतों का मुआयना नहीं किया है। पीड़ित किसान प्रमोद धाकड़, गणेशलाल और जानकीलाल अहिरवार ने बताया कि दुकानदार ने कुछ रसूखदार किसानों को चोरी-छिपे पैसे लौटा दिए हैं, लेकिन गरीब किसानों को दुत्कारा जा रहा है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही कृषि सेवा केंद्र संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं हुई और उन्हें मुआवजा नहीं मिला, तो वे उग्र आंदोलन को विवश होंगे।

प्रशासन का रुख: उप संचालक कृषि ने मामले को संज्ञान में लेते हुए टीम गठित करने की बात कही है। कलेक्टर कार्यालय ने कृषि विभाग को निर्देश दिए हैं कि तत्काल मौके पर जाकर फसल के नुकसान का आंकलन करें और नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करें।

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