हिमाचल: बारिश बनी आफत; 1162 सड़कें बंद, 7 की मौत; प्रदेश में स्कूल–कॉलेजों पर ताला
हिमाचल प्रदेश में लगातार जारी भारी बारिश तबाही मचा रही है। माैसम के कहर से राज्य में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है।
शिमला (आरएनआई) माैसम विभाग के अलर्ट के बीच आपदा प्रभावित हिमाचल प्रदेश में लगातार जारी भारी बारिश तबाही मचा रही है। माैसम के कहर से राज्य में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है। सैकड़ों सड़कें बंद हैं, ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली-पानी की आपूर्ति ठप हो गई है। राज्य में बुधवार सुबह 10:00 बजे सात नेशनल हाईवे सहित 1162 सड़कें बंद रहीं। इसके अतिरिक्त 2477 बिजली ट्रांसफार्मर व 720 जल आपूर्ति योजनाएं ठप हैं। कुल्लू जिले में 204, मंडी 282, शिमला 234, सिरमाैर 137, सोलन 92, कांगड़ा 60, लाहाैल-स्पीति 48 व चंबा जिले में 100 से अधिक सड़कें बाधित हैं। उधर, देश के सभी सरकारी-निजी स्कूल, कॉलेज और डाइट 7 सितंबर तक बंद रहेंगे। ऑनलाइन कक्षाएं लगानी होंगी। भारी बरसात से हो रही तबाही के मद्देनजर सरकार ने यह निर्णय लिया है। बुधवार दोपहर इस संबंध में आदेश जारी किए गए।
सुंदरनगर उपमंडल के जंगमबाग में मंगलवार शाम को अचानक हुए भीषण भूस्खलन ने पूरे इलाके को दहला दिया। चंद सेकंड में पहाड़ी से आए मलबे की जद में दो मकान आ गए और दो परिवारों के सदस्य मलबे में दफन हो गए। इनमें से तीन के शव मंगलवार को बरामद हो गए थे। बुधवार को भी चार और शव बरामद किए गए हैं। मृतकों में दो परिवारों के पांच लोग शामिल हैं।मृतकों की पहचान भारती(30)पत्नी गुरप्रीत सिंह, किरत(3) पुत्री गुरप्रीत सिंह, गुरप्रीत सिंह(35) पुत्र सरवजीत सिंह, सुरेंद्र कौर(56) पत्नी सरवजीत सिंह, शांति देवी(70) पत्नी शिव चंद और गांव डढयाल के ओम प्रकाश(64) पुत्र हेत राम, गांव खतरवाड़ के राहुल पुत्र(25) घनश्याम के रूप में हुई है। एनडीआरएफ की टीम ने घर की छत काटकर दो शवों को निकाला। रात से लगातार सर्च ऑपरेशन जारी रहा।
एसडीएम सुंदरनगर अमर नेगी ने बताया कि सूचना मिलते ही जिला व उपमंडल प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य आरंभ कर दिया। इस कार्य में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें भी तैनात की गईं तथा आवश्यक मशीनरी का प्रयोग किया गया। उपायुक्त अपूर्व देवगन, पुलिस अधीक्षक साक्षी वर्मा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी राहत एवं बचाव कार्य के दौरान मौजूद थे। भूस्खलन से दो मकान (एक पक्का और एक कच्चा) पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि एक पक्का मकान आंशिक रूप से प्रभावित हुआ। इसके अलावा दो स्कूटी और एक टाटा सूमो भी मलबे में दब गई।
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के जोगिंद्रनगर उपमंडल की नेर घरवासड़ा पंचायत में अचानक भूस्खलन होने से 15 मकान क्षतिग्रस्त हो गए। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है। आसपास के अन्य मकानों को भी खतरा देखते हुए पुलिस और प्रशासन की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। पंचायत प्रधान रीना ने जानकारी दी कि अब तक एक मवेशी के मलबे में दबने और 15 मकानों को नुकसान पहुंचने की पुष्टि हुई है। वहीं प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने का काम जारी है। एसडीएम जोगिंद्रनगर मनीष चौधरी और तहसीलदार डॉ. मुकुल अनिल शर्मा राहत एवं बचाव कार्य का नेतृत्व कर रहे हैं। नेर गांव के लोग भी खतरे को देखते हुए सुरक्षित स्थानों की ओर शिफ्ट किए जा रहे हैं। प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है।
कुल्लू जिला मुख्यालय के इनर अखाड़ा बाजार में बीती रात 11:45 बजे भूस्खलन में दो लोग दब गए। मकान के अंदर दबे दोनों लोगों को बचाने के लिए रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है जिसमें एनडीआरएफ, पुलिस और होमगार्ड के जवान डटे हुए हैं। भारी भूस्खलन में मकान में रह रहा एक कश्मीरी मजदूर और दूसरा एनडीआरएफ का जवान दब गया। जबकि एक मजदूर खिड़की से बाहर सुरक्षित निकल गया। बताया जा रहा है कि इनर अखाड़ा के पीछे मठ क्षेत्र से भूस्खलन होने से यह घटना हुई है। उपायुक्त कुल्लू तोरूल एस रवीश ने कहा कि रेस्क्यू अभियान जारी है।
जिला किन्नौर में वांगतू के पास मंगलवार देर रात पहाड़ी से चट्टानों के दरकने से हाईवे पर खड़ी करीब आधा दर्जन गाड़ियां क्षतिग्रस्त हुई हैं। इसमें एक टैंकर चालक और निजी कंपनी के पांच सेब पैकर घायल हुए हैं। मंगलवार रात को करीब 11:15 बजे पहाड़ी दरक गई। सूचना मिलते ही पुलिस थाना टापरी से थाना प्रभारी टापरी शिव कुमार की अगुवाई में टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर सभी घायलों को प्राथमिक उपचार के लिए छोलटू अस्पताल पहुंचाया, जहां पर सभी घायलों का उपचार चल रहा है। सभी घायलों की हालत ठीक बताई जा रही है।
मनाली में अलेउ के समीप पेड़ गिरने के कारण बंद हुआ मनाली-कुल्लू वामतट मार्ग बहाल हो गया है। बुधवार को सुबह ही प्रशासन ने पेड़ को कटवाया। सड़क खुलने के बाद मनाली में जरूरी वस्तुए पहुंचनी शुरू हो गई हैं। वहीं मनालसु नदी में पानी बढ़ने से फंसे टेंपो ट्रैवलर को भी निकल लिया गया है। इसके लिए जेसीबी कि सहायता लेनी पड़ी। अब नदी का जलस्तर भी काफी कम हो गया है लेकिन गांव के लोगों की ओर से बनाई गई सड़क फिर बह गई है।
सुन्नी में सतलुज नदी का जलस्तर थली पुल तक पहुंच गया है और नदी तटवर्ती क्षेत्र, जैसे कालीघाट, आईटीआई, जलमग्न हो गए हैं। कोल डैम के अधिकारियों से जलस्तर कम करने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है। एहतियात के तौर पर कल दो परिवारों को सुरक्षित आश्रय स्थलों पर पहुंचाया गया।
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