शिकायत पर पलटी रिपोर्ट, लेखपाल पर फर्जी आख्या का आरोप, मंठेर तालाब विवाद फिर गरमाया

Jul 24, 2025 - 20:14
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फतेहपुर (आरएनआई) सदर तहसील क्षेत्र के कस्बा दक्षिण स्थित मंठेर तालाब को लेकर राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। गाटा संख्या 1674 को लेकर लेखपाल द्वारा दी गई विरोधाभासी रिपोर्टों ने विवाद को गहरा कर दिया है। फरवरी 2025 में युवा विकास समिति ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया था कि मंठेर तालाब की भूमि पर मिट्टी डालकर पाटने का प्रयास किया जा रहा है। समिति ने स्पष्ट किया था कि यह तालाब जयपुरिया स्कूल के पास स्थित है और गाटा संख्या 1674 में स्थित है। इस शिकायत के बाद कराई गई। जांच में क्षेत्रीय लेखपाल धरमवीर सिंह ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि गाटा संख्या 1674 निजी भूमि है। जिस पर स्कूल निर्माण का कार्य हो रहा है। इसी रिपोर्ट के आधार पर मिट्टी डालने का कार्य रुकवा दिया गया था। हालांकि पांच महीने बाद 22 जुलाई को इसी लेखपाल द्वारा दी गई एक नई रिपोर्ट में उलट स्थिति प्रस्तुत की गई। इस बार लेखपाल ने कहा कि गाटा संख्या 1674 का रकबा 0.1210 हेक्टेयर है और यह राजस्व अभिलेख में तालाब के रूप में दर्ज है। उन्होंने यह भी बताया कि स्थल निरीक्षण में न तो किसी प्रकार की मिट्टी पुराई हो रही है, न कोई कब्जा है और तालाब में पानी भरा पाया गया। इन दोनों रिपोर्टों के बीच का स्पष्ट विरोधाभास अब सवालों के घेरे में है। यदि गाटा संख्या 1674 वास्तव में तालाब है, तो फरवरी में उसे निजी भूमि क्यों बताया गया? और यदि तब निजी भूमि थी, तो अब उसे तालाब कैसे घोषित किया गया? क्या अभिलेखों में हेरफेर हुआ है या रिपोर्टों में जानबूझकर गड़बड़ी की गई है? युवा विकास समिति के अध्यक्ष ज्ञानेन्द्र मिश्रा ने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए जिलाधिकारी से उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि लेखपाल की रिपोर्टें स्पष्ट रूप से भ्रमित करने वाली हैं और कहीं न कहीं भूमाफियाओं को लाभ पहुंचाने की मंशा झलक रही है। समिति का कहना है कि मंठेर तालाब पर्यावरणीय, सामाजिक और सार्वजनिक हित से जुड़ा हुआ है। यदि ऐसी सार्वजनिक संपत्तियों पर कब्जे के प्रयास होते रहे और उन पर फर्जी रिपोर्टों के ज़रिए पर्दा डाला जाता रहा, तो भविष्य में सरकारी तालाबों और चारागाहों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। अब प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि लेखपाल द्वारा प्रस्तुत दोनों रिपोर्टों की तथ्यों के आधार पर तुलना कर निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि लेखपाल दोषी पाया जाए तो अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

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