लाल बहादुर शास्त्री जी शांतिपुरुष की विरासत
कांकेर (आरएनआई) अखिल भारतीय कायस्थ महासभा 7235 के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष रमाशंकर श्रीवास्तव ने कहा कि लाल बहादुर शास्त्री जी का जन्म दिवस 2 अक्टूबर को आने वाला है। शास्त्री जी एक शांतिपुरुष थे और उनका व्यक्तित्व कायस्थ समाज के लिए गौरव की बात है। उनका संपूर्ण जीवन प्रत्येक व्यक्ति के लिए एक प्रेरणा का स्रोत है।
लाल बहादुर शास्त्री भारत के दूसरे प्रधानमंत्री थे, जिन्हें उनके शांत स्वभाव, सादगी और शांतिपूर्ण तरीकों से समस्या समाधान के लिए "शांतिपुरुष" के नाम से जाना जाता है। उनका जीवन सादगी, निष्ठा और देश के प्रति समर्पण का प्रतीक था। शास्त्री जी ने अपने राजनीतिक जीवन में हमेशा शांति और सहयोग के मार्ग पर चलने का प्रयास किया।
लाल बहादुर शास्त्री को "शांतिपुरुष" कहा जाता है क्योंकि वे शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में विश्वास रखते थे। वे किसी भी विवाद या समस्या का समाधान बातचीत और समझौते के माध्यम से करने के पक्षधर थे। उनका मानना था कि शांति और सहयोग से ही देश और समाज का विकास हो सकता है। उनके नेतृत्व में भारत ने कई चुनौतियों का सामना किया, लेकिन उन्होंने हमेशा शांति और संयम का परिचय दिया।
लाल बहादुर शास्त्री को काशी विद्यापीठ से स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद "शास्त्री" की उपाधि मिली थी। यह उपाधि संस्कृत में "विद्वान" या "पवित्र शास्त्रों का ज्ञाता" के अर्थ में प्रयोग की जाती है। शास्त्री जी ने इस उपाधि को अपने नाम के साथ जोड़ लिया और आगे चलकर इसी नाम से प्रसिद्ध हुए।
लाल बहादुर शास्त्री का मूल नाम लाल बहादुर श्रीवास्तव था। उन्होंने जाति-भेद का विरोध करने के लिए अपने नाम से श्रीवास्तव उपनाम का त्याग कर दिया था। शास्त्री जी ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भाग लिया और बाद में जवाहरलाल नेहरू की सरकार में मंत्री के रूप में कार्य किया। नेहरू जी के निधन के बाद वे भारत के दूसरे प्रधानमंत्री बने।
शास्त्री जी के कार्यकाल में भारत ने कई महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना किया, जिनमें 1965 का भारत-पाकिस्तान युद्ध भी शामिल है। इस युद्ध के दौरान उन्होंने "जय जवान जय किसान" का नारा दिया, जो भारतीय सेना और किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है। उन्होंने देश में खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए हरित क्रांति को भी प्रोत्साहित किया।
लाल बहादुर शास्त्री की विरासत आज भी प्रेरणा का स्रोत है। उनकी सादगी, ईमानदारी और देश के प्रति समर्पण ने उन्हें भारतीय राजनीति में एक आदर्श व्यक्तित्व बना दिया। "शांतिपुरुष" के रूप में उनकी पहचान उनके शांतिपूर्ण और सहयोगपूर्ण दृष्टिकोण को दर्शाती है, जो आज भी प्रासंगिक है।
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