बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया का निधन, देश में शोक की लहर
ढाका (आरएनआई)। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की प्रमुख नेता बेगम खालिदा जिया का मंगलवार सुबह निधन हो गया। वह लंबे समय से गंभीर रूप से बीमार थीं और ढाका के एवरकेयर हॉस्पिटल में उनका इलाज चल रहा था। बीएनपी ने एक फेसबुक पोस्ट के माध्यम से बताया कि डॉक्टरों ने उन्हें सुबह करीब छह बजे मृत घोषित कर दिया।
पार्टी के अनुसार, सोमवार देर रात उनकी तबीयत अचानक और बिगड़ गई थी। उन्हें बेहतर इलाज के लिए लंदन ले जाने की तैयारी की जा रही थी और कतर से एक विशेष विमान भी स्टैंडबाय पर रखा गया था, लेकिन मेडिकल बोर्ड ने उनकी नाजुक हालत को देखते हुए उन्हें अस्पताल से एयरपोर्ट तक ले जाने की अनुमति नहीं दी।
बेगम खालिदा जिया उम्र से जुड़ी कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित थीं। उनके डॉक्टरों के मुताबिक उन्हें एडवांस लिवर सिरोसिस, डायबिटीज, गठिया और दिल व सीने से जुड़ी जटिलताएं थीं। 23 नवंबर से वह अस्पताल में भर्ती थीं और 11 दिसंबर को उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। दो दिन पहले डॉक्टरों ने उनकी हालत को बेहद नाजुक बताया था।
15 अगस्त 1945 को दिनाजपुर जिले में जन्मीं खालिदा जिया बांग्लादेश की राजनीति की सबसे प्रभावशाली शख्सियतों में से एक रहीं। वह देश के पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान की पत्नी थीं, जिनकी 1981 में हत्या कर दी गई थी। इसके बाद उन्होंने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की कमान संभाली और जल्द ही राष्ट्रीय राजनीति में एक मजबूत नेता के रूप में उभरीं।
खालिदा जिया बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं और उन्होंने तीन बार देश का नेतृत्व किया। उनका पहला कार्यकाल 1991 से 1996 तक रहा, दूसरा 1996 में कुछ महीनों के लिए और तीसरा 2001 से 2006 तक चला। उनके शासनकाल में आर्थिक सुधारों, निजीकरण और बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर दिया गया, हालांकि भ्रष्टाचार, उग्रवाद और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर उनकी सरकार पर गंभीर आरोप भी लगे।
उनकी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता प्रधानमंत्री शेख हसीना के साथ बांग्लादेश की राजनीति की सबसे तीखी और लंबी लड़ाइयों में गिनी जाती रही है। शेख हसीना के शासनकाल में भ्रष्टाचार के एक मामले में खालिदा जिया को 2018 में जेल की सजा सुनाई गई थी, जिसे बीएनपी ने राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया था। हालांकि कोरोना महामारी के दौरान मार्च 2020 में उन्हें सशर्त अस्थायी रिहाई दी गई थी, जिसके बाद वह लगातार बीमार रहने लगी थीं।
खालिदा जिया का निधन ऐसे समय हुआ है जब बांग्लादेश गंभीर राजनीतिक उथल-पुथल से गुजर रहा है और फरवरी में आम चुनाव होने वाले हैं। उनके बेटे तारिक रहमान हाल ही में करीब 17 साल बाद देश लौटे हैं, जिससे बीएनपी में नई राजनीतिक हलचल देखी जा रही थी।
अपने पीछे वह अपने बेटे तारिक रहमान, उनकी पत्नी और पोती को छोड़ गई हैं। उनके छोटे बेटे अराफात रहमान कोको का कुछ वर्ष पहले मलेशिया में निधन हो गया था।
बेगम खालिदा जिया के निधन से बांग्लादेश की राजनीति के एक बड़े अध्याय का अंत हो गया है। देश भर में उनके समर्थकों और राजनीतिक हलकों में शोक की लहर है, जबकि दुनिया भर के नेता उन्हें एक प्रभावशाली और निर्णायक राजनेता के रूप में याद कर रहे हैं।
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